पटना एयरपोर्ट पर बिहार कांग्रेस में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। टिकट बंटवारे को लेकर नाराज़ कार्यकर्ता कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू, राजेश राम और शकील अहमद खान से अपनी नाराज़गी जताने पहुंचे थे, लेकिन मामला देखते ही देखते बवाल में बदल गया।
एयरपोर्ट पर मौजूद कार्यकर्ताओं के बीच जमकर धक्का-मुक्की और बहस हुई। बताया जा रहा है कि इस दौरान पप्पू यादव समर्थकों और अन्य गुटों के बीच भी तीखी नोकझोंक हुई। मौके पर मौजूद नेताओं के लिए स्थिति संभालना मुश्किल हो गया। राहत की बात रही कि इस दौरान कोई गोलीबारी नहीं हुई, वरना माहौल और बिगड़ सकता था।
नेताओं के सामने भिड़े कार्यकर्ता
सूत्रों के मुताबिक, कई जिलों से आए कांग्रेसी कार्यकर्ता टिकट वितरण से असंतुष्ट थे। जैसे ही उन्होंने नेताओं से जवाब मांगा, भीड़ बेकाबू हो गई। कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट की स्थिति बन गई। यह पूरा हंगामा पटना एयरपोर्ट के बाहर कैमरों में कैद हो गया और अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह विवाद कांग्रेस की आंतरिक असहमति और तैयारी की पोल खोलता है। महागठबंधन के अंदर तालमेल की कमी साफ झलक रही है। जिस समय कांग्रेस को जनता तक अपने “वोट चोरी कैंपेन” को मजबूत करने की जरूरत थी, वह आपसी संघर्ष में उलझ गई है।
कांग्रेस की रणनीति पर उठे सवाल
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अगर कांग्रेस सीटों पर पहले से सहमति बना लेती तो यह स्थिति नहीं आती। सीटों पर खींचतान के चलते न तो प्रचार शुरू हो पा रहा है और न ही मुद्दों पर कोई फोकस है।
प्रशांत किशोर का बयान याद आया
राजनीति के रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने एक बार कहा था, “अब बिहार में हर कोई नेता बनना चाहता है।” मौजूदा हालात देखकर लगता है कि यह बात सच साबित हो रही है। दिलचस्प बात यह है कि पीके खुद चुनावी मैदान से दूर हो चुके हैं, जबकि राज्य की राजनीति फिर से पुराने समीकरणों में उलझ गई है।
अब फोकस सिर्फ सीट और जातीय गणित पर
बिहार में एक बार फिर मुद्दों से ज़्यादा सीटों की सेटिंग और जातीय संतुलन पर ध्यान दिया जा रहा है। चुनावी माहौल में विकास की बातें कहीं पीछे छूट गई हैं।







