पटना।आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने बागियों और विरोधियों से निपटने के लिए नई रणनीति तैयार की है। पिछले चुनावों में मिली शिकस्त से सबक लेते हुए एनडीए के दिग्गज इस बार एक-एक सीट पर मजबूत पकड़ बनाने में जुट गए हैं।
राजग के शीर्ष नेताओं और रणनीतिकारों का मानना है कि टिकट बंटवारे के बाद विरोधी दलों की तुलना में एनडीए के अंदरूनी बागी ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए प्रत्याशी चयन से लेकर नामांकन और प्रचार तक की पूरी रूपरेखा पहले ही तय कर ली गई है।
पिछली बार के अनुभव से सबक
पिछले चुनाव में बागियों और असंतोष के चलते एनडीए को आठ जिलों—बक्सर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, अरवल, जहानाबाद, शिवहर और किशनगंज—में हार का सामना करना पड़ा था। इन जिलों में बागी उम्मीदवारों ने समीकरण बिगाड़ दिए थे। इस बार ऐसी गलती न दोहराने के लिए एनडीए ने ‘फुलप्रूफ इलेक्शन प्लान’ बनाया है, जिसमें सीट बंटवारे से लेकर प्रचार की रणनीति तक शामिल है।
सामाजिक समीकरण और परिवारवाद से चुनौती
राजग को सत्ता विरोधी लहर और परिवारवाद के आरोपों से भी जूझना पड़ रहा है। इसके साथ ही सामाजिक संतुलन साधने की बड़ी चुनौती है। शीर्ष नेताओं के साथ ही स्थानीय कार्यकर्ताओं को भी जिम्मेदारी दी गई है कि वे असंतोष को नियंत्रित रखें और विपक्ष को इसका लाभ न उठाने दें।
गुटबाजी पर सख्त निगरानी
विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र और राज्य की संयुक्त नीतियों, सही उम्मीदवार चयन और जमीनी मुद्दों पर फोकस से एनडीए को फायदा हो सकता है। वहीं, विपक्ष में गुटबाजी और असंगठित नेतृत्व उसे कमजोर कर सकता है।
कई सीटों पर अब भी कार्यकर्ताओं में असंतोष दिख रहा है और कुछ विधायक दल बदलने की फिराक में हैं। इसे देखते हुए राजग ने ‘इनसाइड मॉनिटरिंग टीम’ बनाई है जो भितरघातियों पर पैनी नजर रखेगी।
नई रणनीति से बागियों पर ब्रेक की कोशिश
इस बार हर जिले में वरिष्ठ नेताओं को तैनात किया गया है ताकि वे असंतोष और बागी गतिविधियों को समय रहते रोक सकें। राजग का लक्ष्य साफ है—हर सीट पर एकजुट होकर चुनाव लड़ना और 2020 की तरह की गलतियां दोबारा न दोहराना।







