छत्तीसगढ़ के 9 बड़े घोटाले अधर में, जांच लटकी और SC ने दी डेडलाइन — अब 90 दिन में रिपोर्ट जरूरी

Madhya Bharat Desk
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रायपुर।छत्तीसगढ़ में पिछले दो वर्षों से ईडी (Enforcement Directorate), ईओडब्ल्यू-एसीबी (Economic Offence Wing – Anti Corruption Bureau) और सीबीआई (CBI) कई करोड़ों के बहुचर्चित घोटालों की जांच में जुटी हैं। मगर, आज तक एक भी मामला पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है।

इनमें शामिल हैं — शराब घोटाला, कोल लेवी केस, डीएमएफ फंड गड़बड़ी, कस्टम मिलिंग, महादेव सट्टा एप, नान घोटाला, एनजीओ घोटाला, सीजीपीएससी और सीजीएमएससी में दवा खरीदी की अनियमितताएं।
इन मामलों में करीब 50 आरोपी रायपुर जेल में बंद हैं, जिनमें पूर्व मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री का बेटा और कई आईएएस अफसर शामिल हैं।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 3,200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले की धीमी जांच पर नाराजगी जताई और ईडी व ईओडब्ल्यू को 90 दिनों में अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।

 केस 1 — सीजीएमएससी घोटाला (₹411 करोड़)

2022-23 के बीच हुए इस घोटाले में मोक्षित कॉर्पोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा सहित छह आरोपी जेल में हैं।
सीजीएमएससी के अफसर बसंत कौशिक, क्षिरोद राउतिया, कमलकांत पटनवार, डॉ. अनिल परसाई और दीपक कुमार बंधे भी शामिल हैं।
अन्य आरोपियों पर जांच जारी है।

 केस 2 — कोल लेवी घोटाला (₹570 करोड़)

ईडी और ईओडब्ल्यू इस मामले की जांच कर रही हैं।
जुलाई 2024 में पहले चार्जशीट में 15 आरोपियों के नाम आए —
सौम्या चौरसिया, आईएएस रानू साहू, समीर विश्नोई, सूर्यकांत तिवारी आदि।
अक्टूबर 2024 में पूरक चार्जशीट में मनीष उपाध्याय और रजनीकांत तिवारी के नाम जुड़े।
हाल ही में देवेंद्र डडसेना और नवनीत तिवारी पर 1,500 पेज की रिपोर्ट दाखिल की गई, जिसमें कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को फरार बताया गया।

 केस 3 — डीएमएफ घोटाला (₹550 करोड़)

इस मामले में रानू साहू, माया वारियर, अनिल टुटेजा, सौम्या चौरसिया सहित 10 से अधिक लोग आरोपी हैं।
जांच एजेंसी ने कई कारोबारी ठिकानों पर दबिश दी और छह आईएएस अफसरों को भी रडार पर रखा गया है।

 केस 4 — महादेव सट्टा एप घोटाला

मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल अब भी फरार हैं।
निलंबित एएसआई चंद्रभूषण वर्मा सहित 12 लोगों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।
ईडी ने आरोप लगाया है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रमोटरों से 508 करोड़ रुपये की रिश्वत ली थी।

 केस 5 — एनजीओ घोटाला (₹1,000 करोड़)

सीबीआई ने समाज कल्याण विभाग के कार्यालय से दस्तावेज जब्त किए हैं।
एफआईआर में विवेक ढांड, सुनील कुजूर, एमके राउत, बीएल अग्रवाल, डॉ. आलोक शुक्ला, राजेश तिवारी जैसे बड़े अफसरों के नाम शामिल हैं।
पूर्व मंत्री रेणुका सिंह, लता उसेंडी और अनिला भेड़िया से भी पूछताछ की तैयारी है।

 केस 6 — शराब घोटाला (₹3,200 करोड़)

इस घोटाले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, चैतन्य बघेल, अनिल टुटेजा, एपी त्रिपाठी, अनवर ढेबर समेत 14 आरोपी जेल में हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 तक अंतिम रिपोर्ट पेश करने की सख्त डेडलाइन तय की है।

छत्तीसगढ़ के इन 9 बड़े घोटालों की जांच अब निर्णायक मोड़ पर है।
सुप्रीम कोर्ट की समयसीमा ने जांच एजेंसियों पर दबाव बढ़ा दिया है —
अब देखना यह होगा कि दिसंबर तक ये मामले फाइनल रिपोर्ट तक पहुंचते हैं या फिर एक बार फिर “जांच जारी” ही रह जाती है।

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