भाजपा ने बिहार में टिकट वितरण के बाद हो सकने वाली बगावत और नाराजगी को रोकने के लिए अपनी रणनीति को और तेज कर दिया है। इसके लिए पार्टी नेतृत्व ने धर्मेंद्र प्रधान को संचालक पद, सीआर पाटिल और केशव मौर्य को रणनीति संचालक बनाया है।
राज्य की 40 लोकसभा सीटों को तीन जोनों में बाँटा गया है। पाटिल सीमांचल–कोसी जोन के लिए जिम्मेदार होंगे। उनके दायित्व में कटिहार, पूर्णिया, अररिया, बेगूसराय, भागलपुर, मुंगेर, किशनगंज, समस्तीपुर, मधेपुरा, जमुई, सुपौल, नवादा एवं खगड़िया की सीटें शामिल हैं — कुल 78 विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों के बीच मनमुटाव और बगावत रोकने की रणनीति बनाएंगे।
मौर्य को 13 सीमावर्ती जिलों की इन सीटों की कोऑर्डिनेशन और विवाद न बढ़ने देने की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी को डर है कि टिकट न मिलने या सीट आवंटन से नाखुश नेता अलग रुख अपना सकते हैं या बगावती हो सकते हैं।
इस चुनावी तैयारी में भाजपा ने सोशल मीडिया युद्ध की भी तैयारी कर रखी है। पाटिल और मौर्य की टीम सोशल मीडिया पर प्रशांत किशोर को टक्कर देने की रणनीति बनाएगी — फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर प्रचार अभियानों की योजना है।
रणनीतिकार मानते हैं कि बिना मजबूत संगठन के प्रशांत किशोर का सोशल मीडिया दबदबा इस चुनाव में कुछ ख़ास असर नहीं दिखा पाएगा। इसलिए पार्टी की योजना है कि हर वोटर तक कम-से-कम 10 बार संवाद हो — घर-घर, फेस-टू-फेस।
वहीं विपक्षी महागठबंधन में सीट बँटवारे को लेकर मतभेद गहराए हैं। कांग्रेस अतिरिक्त सीटों की मांग पर अड़ी है, जबकि वाम दलों ने प्रस्ताव ठुकरा दिया है। राजद (RJD) ने 125 सीटों की आकांक्षा जताई है, कांग्रेस 55–57, वाम दल 35, VIP 20, RLJP 3 एवं JMM 2 सीटों की मांग कर सकते हैं।







