ट्रांसफर पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: प्रशासनिक जरूरत के आधार पर हुआ तबादला, अदालत ने याचिका की खारिज

Madhya Bharat Desk
2 Min Read

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि स्थानांतरण (Transfer) सेवा का अभिन्न हिस्सा है और इस पर अदालत का हस्तक्षेप केवल उन्हीं परिस्थितियों में उचित है, जब आदेश में दुर्भावना (Malafide intention) या नियमों का उल्लंघन सिद्ध हो। अदालत ने कहा कि ट्रांसफर प्रशासनिक आवश्यकता और जनहित का विषय है, और किसी भी कर्मचारी को सरकार या नियोक्ता की जरूरत के अनुसार कहीं भी पदस्थ किया जा सकता है।

यह मामला बिलासपुर जिले के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी जितेंद्र कुमार से जुड़ा है, जिन्हें मानिकचौरी (मस्तूरी) स्थानांतरित किया गया था। उन्होंने इस ट्रांसफर आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि वे मूल रूप से स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन कार्यरत हैं और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के नियमित कर्मचारी नहीं हैं, इसलिए उनका ट्रांसफर करने का अधिकार कलेक्टर या डीईओ के पास नहीं है।

जितेंद्र कुमार ने यह भी कहा कि वे वर्ष 1994 में सहायक ग्रेड-3 पद पर नियुक्त हुए थे और वर्ष 2008 में सहायक ग्रेड-2 के पद पर पदोन्नत हुए। वर्तमान में वे डीईओ कार्यालय बिलासपुर के विधि प्रकोष्ठ में लेखा परीक्षक के रूप में कार्यरत हैं। उनका तर्क था कि ट्रांसफर आदेश न तो प्रशासनिक आवश्यकता पर आधारित है और न ही नियमसम्मत।

हालांकि, शासन की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि ट्रांसफर आदेश प्रशासनिक आवश्यकता और जनहित को ध्यान में रखकर जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि स्थानांतरण राज्य का विशेषाधिकार (Prerogative) है और अदालत इसमें तब तक दखल नहीं दे सकती जब तक कोई स्पष्ट दुर्भावना या नियमभंग सिद्ध न हो।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह कहा कि कर्मचारी का तबादला सेवा का हिस्सा है और इसे चुनौती देने का कोई ठोस आधार नहीं है। चूंकि आदेश में किसी भी तरह की दुर्भावना या नियमों के उल्लंघन का प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया, इसलिए याचिका को खारिज कर दिया गया।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment