बिलासपुर-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) प्रदेश की प्रमुख सड़कों में से एक है, जिस पर रोजाना हजारों वाहन आवाजाही करते हैं। यह मार्ग प्रदेश की अर्थव्यवस्था, व्यापार और आवागमन की रीढ़ है, लेकिन हाल के वर्षों में इस सड़क पर बनाए गए अनियमित और खतरनाक स्पीड ब्रेकर अब हादसों का कारण बनते जा रहे हैं।
सात साल पहले हाई कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया था और प्रदेशभर से अनधिकृत स्पीड ब्रेकर हटाने के निर्देश दिए थे। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने तब कार्रवाई करते हुए सड़कों से गैरजरूरी स्पीड ब्रेकर हटाए भी थे। लेकिन अब एक बार फिर बिलासपुर से रायपुर एनएच पर आधा दर्जन से ज्यादा जगहों पर बिना मानक के स्पीड ब्रेकर बना दिए गए हैं।
वाहन चालकों का कहना है कि ये ब्रेकर अचानक नजर आते हैं, जिससे गाड़ी पर नियंत्रण बिगड़ने की आशंका रहती है। कई बार रात में या बारिश के मौसम में इनकी दृश्यता इतनी कम होती है कि हादसे होना तय लगते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इंडियन रोड कांग्रेस (IRC) और ट्रैफिक इंजीनियरिंग के मानकों के अनुसार एनएच और एक्सप्रेस-वे पर स्पीड ब्रेकर नहीं बनाए जाने चाहिए, क्योंकि ये सड़कें तेज गति वाले वाहनों के लिए डिज़ाइन की जाती हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ में इन नियमों का पालन नहीं हो रहा।
बिलासपुर निवासी डीडी आहूजा ने 2018 में इस विषय पर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि राज्य की अधिकांश सड़कों पर बने ब्रेकर मानकों के अनुरूप नहीं हैं। अदालत ने तब निर्देश दिए थे कि सभी अनधिकृत ब्रेकर तत्काल हटाए जाएं।
हाई कोर्ट की नाराजगी के बाद विभाग ने रिपोर्ट दी थी कि सभी ब्रेकर हटा दिए गए हैं और जिला स्तरीय समितियां निगरानी कर रही हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर कुछ और ही है। बिलासपुर-रायपुर एनएच, कोटा रोड, रतनपुर-कैंदा रोड और मंगलामहर्षि स्कूल से उसलापुर स्टेशन तक के मार्गों पर आज भी कई खतरनाक ब्रेकर बने हुए हैं।







