छत्तीसगढ़ में सरकारी जमीन पर रहने वालों को मिलेगा पट्टा, 15 अगस्त तक होगा सर्वे

Madhya Bharat Desk
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छत्तीसगढ़ सरकार ने शहरों में लंबे समय से सरकारी जमीन पर रह रहे जरूरतमंद परिवारों को राहत देने की तैयारी तेज कर दी है। सरकार अब ऐसे लोगों को जमीन का पट्टा देने की प्रक्रिया शुरू कर रही है, जो साल 2017 से पहले से वहां निवास कर रहे हैं। इसके लिए प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में सर्वे का काम शुरू करा दिया गया है।

राजस्व विभाग की ओर से सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए गए हैं कि 15 अगस्त 2026 तक सर्वे पूरा कर रिपोर्ट भेजी जाए। सर्वे रिपोर्ट संचालक भू-अभिलेख कार्यालय को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर पात्र लोगों की सूची तैयार कर पट्टा वितरण किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार इस सर्वे के लिए नगरीय निकाय और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम बनाई जाएगी। नियमों के तहत नगर निगम क्षेत्र में अधिकतम 600 वर्गफीट और नगर पालिका व नगर पंचायत क्षेत्रों में 800 वर्गफीट तक जमीन पर कब्जा रखने वाले लोगों को पात्र माना जाएगा। इससे ज्यादा जमीन पर कब्जा अतिक्रमण की श्रेणी में आएगा।

सरकार की योजना है कि पात्र लोगों को शुरुआती तौर पर 30 साल का पट्टा दिया जाए, जिसे बाद में नवीनीकरण भी कराया जा सकेगा।

हालांकि हर व्यक्ति को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। जिन लोगों के पास पहले से मकान है, या जिन्होंने तालाब, नाले, ग्रीन बेल्ट, फुटपाथ और सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर कब्जा किया है, उन्हें योजना से बाहर रखा जाएगा। इसके अलावा रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और विकास कार्यों में बाधा बनने वाले कब्जों को भी पात्रता नहीं मिलेगी।

पट्टा पाने के लिए लोगों को अपने निवास और कब्जे से जुड़े दस्तावेज देने होंगे। इनमें मतदाता सूची में नाम, बिजली या टेलीफोन बिल, संपत्तिकर रिकॉर्ड, जलकर रसीद, भवन अनुमति पत्र या पांच साल पुराने आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे प्रमाण शामिल किए गए हैं।

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