छत्तीसगढ़ के सरगुजा और सूरजपुर जिलों से एक दर्दनाक घटना सामने आई है जिसने न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविकता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की तस्वीर भी उजागर कर दी है।
परिजनों का आरोप है कि सूरजपुर जिले की एक गर्भवती महिला को जब गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया तो समय पर उसका इलाज नहीं किया गया। महिला की स्थिति बिगड़ने लगी, लेकिन डॉक्टरों ने इलाज शुरू करने में देर कर दी। हालात और बिगड़ने पर उसे अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। परिजनों का कहना है कि अंबिकापुर पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश पैदा कर दिया है। परिजनों का आरोप है कि 108 एंबुलेंस स्टाफ ने भी रिश्वत के तौर पर 800 रुपये की मांग की थी। यह आरोप और भी गंभीर हो जाता है क्योंकि एंबुलेंस जैसी सेवा जनता की सुविधा के लिए निःशुल्क होती है।
स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और डॉक्टरों की कथित लापरवाही के कारण एक गर्भवती महिला की जान चली गई, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की सच्चाई उजागर हो गई है। यह घटना प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन पर सीधे तौर पर सवाल खड़े करती है कि आखिर कब तक लोग समय पर इलाज और पारदर्शी सेवाओं के अभाव में अपनी जान गंवाते रहेंगे।







