हाल ही में आयोजित कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस के दौरान एक असहज स्थिति तब उत्पन्न हो गई जब महिला अपराधों को लेकर सवाल-जवाब के बीच माहौल गरमा गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में चल रही इस बैठक में गृहमंत्री विजय शर्मा ने महासमुंद जिले में महिला अपराधों की बढ़ती संख्या पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने जिले के एसपी से सीधे सवाल किया कि उनके जिले में अपराध की स्थिति इतनी खराब क्यों है।
बैठक में यह भी सामने आया कि महासमुंद में महिला अपराधों की संख्या अन्य जिलों की तुलना में अधिक है। मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिया कि महिला और बालिकाओं से जुड़े अपराधों में संवेदनशीलता और तत्परता से कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि समय-सीमा के भीतर चार्जशीट पेश की जानी चाहिए ताकि पीड़िताओं को जल्द न्याय मिल सके।
गृहमंत्री विजय शर्मा ने एसपी से पूछा कि 60 दिनों के भीतर आरोपियों के खिलाफ चालान क्यों पेश नहीं किए जा रहे हैं। इस पर एसपी ने जवाब दिया कि कई आरोपी “माइग्रेट” होकर दूसरे राज्यों में चले जाते हैं, जिससे गिरफ्तारी में देरी होती है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि जिले का बड़ा हिस्सा प्रवासी मजदूरों से जुड़ा है, जो काम के लिए बाहर रहते हैं।
गृहमंत्री इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और गुस्से में पूछ बैठे, “क्या आपका जिला छत्तीसगढ़ से बाहर है?” इस वाक्य के बाद बैठक का माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया। मुख्यमंत्री और अन्य अधिकारी यह दृश्य देख हैरान रह गए। अंततः मुख्यमंत्री ने सभी जिलों को “सक्रिय और परिणाममुखी पुलिसिंग” अपनाने के निर्देश दिए ताकि महिला अपराधों पर कड़ी कार्रवाई हो सके।
यह घटना न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर सवाल उठाती है बल्कि यह भी दिखाती है कि महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार कितनी गंभीर है। यह मामला अब प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक चुनौती बन चुका है।







