अंबिकापुर। हसदेव बचाओ संघर्ष समिति ने आज गांधी चौक, अंबिकापुर में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। समिति ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए अडानी समूह द्वारा संचालित सभी कोयला खनन परियोजनाओं को रद्द करने की मांग की।
जैव विविधता पर संकट
छत्तीसगढ़ का समृद्ध और जैव विविधता से भरपूर वन क्षेत्र हसदेव अरण्य राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आवंटित तीन कोल ब्लॉकों—परसा ईस्ट केते बासेन, परसा और केंते एक्सटेंशन—के कारण संकट में है। इन ब्लॉकों का संचालन अडानी समूह को माइन डेवलपर एंड ऑपरेटर (MDO) अनुबंध के तहत सौंपा गया है। खनन के लिए करीब 12 लाख पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। यह इलाका कई विलुप्तप्राय जीव-जंतुओं और पक्षियों का निवास है, साथ ही यह हसदेव और रिहंद नदियों का कैचमेंट क्षेत्र है।

पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव
- मानव-हाथी संघर्ष: प्राकृतिक आवास खत्म होने से हाथी अब गांवों में घुस रहे हैं। इस संघर्ष में सैकड़ों जानें जा चुकी हैं।
- जल संकट: खनन से भूजल और नदी प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे छत्तीसगढ़ में जल संकट गहराता जा रहा है।
- धार्मिक व ऐतिहासिक क्षति: विस्फोटों से रामगढ़ की प्राचीन पहाड़ी और नाट्यशाला को अपूरणीय नुकसान हो रहा है।
सरकारी रिपोर्टों और प्रस्तावों की अनदेखी
धरने में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार सभी चेतावनियों और जनविरोध को नजरअंदाज कर रही है:
- विधानसभा का प्रस्ताव (26 जुलाई 2022): सभी कोल ब्लॉकों को निरस्त करने का सर्वसम्मति से संकल्प पारित हुआ था।
- भारतीय वन्यजीव संस्थान की रिपोर्ट: यहां एक भी खदान खुली तो मानव-हाथी संघर्ष विकराल रूप लेगा।
- ग्रामसभा प्रस्तावों में फर्जीवाड़ा: अनुसूचित जनजाति आयोग की जांच में परसा कोल ब्लॉक की स्वीकृति में फर्जी दस्तावेज पाए गए।
समिति ने आरोप लगाया कि हसदेव अरण्य को सिर्फ कॉर्पोरेट फायदे के लिए नष्ट किया जा रहा है, जबकि इससे स्थानीय लोगों, पर्यावरण और जैव विविधता पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।







