छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों की हड़ताल लगातार जारी है। सरकार की कई चेतावनियों और अल्टीमेटम के बावजूद कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। पिछले 31 दिनों से करीब 16 हजार कर्मचारी हड़ताल पर बैठे हुए हैं, जिसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर पड़ने लगा है।
स्वास्थ्य विभाग ने इस स्थिति से निपटने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। विभाग ने बलौदाबाजार के 160 और कोरबा के 21 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। इसके साथ ही अब तक लगभग 200 कर्मचारियों को बर्खास्त किया जा चुका है। विभागीय सचिव अमित कटारिया ने सभी जिलों के सीएमएचओ को निर्देश दिए हैं कि जो भी कर्मचारी काम पर नहीं लौटे हैं, उन्हें व्यक्तिगत आदेश जारी कर सेवा से मुक्त कर दिया जाए। साथ ही जिलों को खाली पदों की सूची तैयार कर तुरंत नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
दूसरी ओर, एनएचएम कर्मचारी सरकार की इस कार्रवाई के खिलाफ और ज्यादा आक्रामक हो गए हैं। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी ने साफ कहा है कि कोई भी कर्मचारी ड्यूटी पर वापस नहीं लौटेगा। हड़ताली कर्मचारियों ने राजधानी रायपुर में “जेल भरो आंदोलन” करने का ऐलान किया है और इसके लिए प्रदेश के 33 जिलों से कर्मचारी जुटने की तैयारी कर रहे हैं।
यह विवाद सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव की स्थिति को और गहरा कर रहा है। एक ओर जहां सरकार का कहना है कि किसी भी हालत में स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा, वहीं कर्मचारी अपने अधिकारों और मांगों पर अडिग हैं। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में जाता है।



