काठमांडू। नेपाल सेना मुख्यालय के बाहर बुधवार शाम तनाव बढ़ गया जब अंतरिम प्रधानमंत्री चुनने को लेकर बातचीत जारी थी। इस दौरान अलग-अलग उम्मीदवारों का समर्थन कर रहे जेन-जेड गुटों में भिड़ंत हो गई।
दरअसल, पीएम केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद सत्ता का खाली पद अब चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है। अंतरिम पीएम की कुर्सी के लिए कई बड़े नाम सामने आए हैं। इनमें काठमांडू के मेयर और रैपर बलेंद्र शाह बालेन, पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की और नेपाल बिजली प्राधिकरण के पूर्व प्रमुख कुलमान घिसिंग शामिल हैं।
पीएम की दौड़ में कौन आगे?
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुलमान घिसिंग इस रेस में सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। घिसिंग को ‘ब्लैकआउट खत्म करने वाले इंजीनियर’ के रूप में देशभर में पहचान मिली थी। उन्होंने काठमांडू घाटी में बिजली कटौती की पुरानी समस्या को खत्म कर युवाओं के बीच लोकप्रियता हासिल की।
25 नवंबर 1970 को रामेछाप जिले में जन्मे घिसिंग ने भारत के जमशेदपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में नेपाल के पुलचौक इंजीनियरिंग कॉलेज से उच्च शिक्षा ली। इसके अलावा उन्होंने एमबीए भी किया है।
अब भी फंसा है पेच
इस रेस में धरान के मेयर हरका संपंग राय का नाम भी जोड़ा गया है। लेकिन राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और सेना प्रमुख के बीच लगातार बातचीत के बावजूद अब तक किसी नाम पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई है।
जेन-जेड गुटों में हिंसा
गुरुवार शाम हालात और बिगड़ गए। बालेन और सुशीला कार्की के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई जिसमें 30 लोगों की मौत हो चुकी है। राष्ट्रपति ने अपील की है कि शांति बनाए रखें और समाधान जल्द तलाशने का भरोसा दिया है।
ओली के इस्तीफे से पहले भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ युवाओं ने देशभर में ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। इन्हीं परिस्थितियों के चलते अब नेपाल में एक नई अंतरिम सरकार बनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है।







