रायपुर। छत्तीसगढ़ में 2700 करोड़ रुपए के मेडिकल घोटाले को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस शासनकाल में हुए इस घोटाले की जांच वर्तमान भाजपा सरकार करा रही है। लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जांच की आंच पूर्व स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव और उनके करीबी सहयोगी आनंद सागर तक भी पहुंचेगी?
ईओडब्ल्यू अब तक रीएजेंट घोटाले पर सिमटी
ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) की कार्रवाई अभी केवल रीएजेंट घोटाले तक सीमित है। इस मामले में सीजीएमएससी (CGMSC) के कुछ अधिकारी-कर्मचारी और सप्लायर मोक्षित कॉरपोरेशन के शशांक चोपड़ा को जेल भेजा गया है।
लेकिन स्वास्थ्य विभाग की अन्य खरीदारियों में भी अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं। दस्तावेज सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस मामले की गहन जांच में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
सिंहदेव के सहयोगी आनंद सागर पर आरोप
कांग्रेस सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे टीएस सिंहदेव के सहयोगी आनंद सागर पर आरोप है कि मेडिकल खरीदी का पूरा हिसाब-किताब उनके जिम्मे था। सूत्रों का दावा है कि उन्होंने “बाबा” के विश्वासपात्र होने का फायदा उठाया।
भाजपा पर नरमी के आरोप
सूत्र का मानना हैं कि भाजपा सरकार जानबूझकर सिंहदेव और आनंद सागर को जांच के दायरे से बाहर रख रही है। आलोचकों का कहना है कि अगर सरकार सच में निष्पक्ष जांच कराए, तो इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
आगे क्या?
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अगर जांच निष्पक्ष हुई तो आने वाले समय में सिंहदेव और आनंद सागर का नाम भी आरोपी सूची में जुड़ सकता है। छत्तीसगढ़ की जनता अब यह देखना चाहती है कि भाजपा सरकार इस घोटाले में कितनी सख्ती दिखाती है।



