प्रस्तावना:
भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। सरकारी तंत्र की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल तब और गहराते हैं जब सरकारी अधिकारी ही जनता के हितों की अनदेखी कर अवैध कार्यों में लिप्त पाए जाते हैं। हाल ही में कोरबा जिले से एक ऐसा ही मामला सामने आया जिसने पूरे क्षेत्र को चौंका दिया।
मुख्य घटना:
कोरबा जिले में राजस्व विभाग के एक पटवारी ने सरकारी जमीन को निजी संपत्ति बताकर दो व्यक्तियों को बेच दिया। इतना ही नहीं, इन लोगों ने इन जमीनों को बैंक में गिरवी रखकर लोन भी प्राप्त कर लिया। जब इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ, तब जिला कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषी पटवारी को तत्काल निलंबित कर जांच के आदेश जारी किए।
विस्तार:
गौरतलब है कि राज्य में सरकार बदलने के बाद भी राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला कोरबा जिले के पौड़ी-उपरोड़ा विकासखंड का है, जहां पटवारी जितेंद्र कुमार भावे ने अपने कार्यकाल में सरकारी जमीनों का निजी नामांतरण करते हुए पट्टा जारी कर दिया। दस्तावेज़ों में कूटरचना कर सरकारी जमीन को निजी नाम पर दर्ज करना गंभीर अपराध है। इसका खुलासा होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है।







