इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) में आयोजित डिबेट प्रतियोगिता उस समय चर्चा का केंद्र बन गई जब मेयर के बेटे ने मुख्यमंत्री के सामने ही जमीन घोटालों का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि पारदर्शिता केवल बुलेट प्रेजेंटेशन तक ही सीमित रह गई है, जबकि ज़मीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों में दलालों की भूमिका गहरी है और कई महत्वपूर्ण योजनाएँ इन्हीं की पकड़ में फँसकर अपनी असली दिशा खो देती हैं।
उन्होंने विशेष तौर पर रेलवे परियोजनाओं का जिक्र किया और कहा कि वहाँ भी दलालों की मिलीभगत से गड़बड़ियाँ हो रही हैं। जहाँ मंच पर विकास की तस्वीरें रंगीन स्लाइड्स में दिखाई जाती हैं, वहीं असलियत में भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों की परतें छुपी होती हैं। उनकी इस बेबाकी ने न सिर्फ छात्रों का ध्यान खींचा बल्कि मंच पर मौजूद सभी अतिथियों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया।
यह डिबेट प्रतियोगिता केवल शैक्षणिक गतिविधि न होकर सामाजिक और राजनीतिक सच्चाई को उजागर करने का माध्यम बन गई। एक युवा नेता द्वारा मुख्यमंत्री के सामने सीधे सवाल उठाना इस बात का संकेत है कि नई पीढ़ी अब पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही को लेकर और अधिक जागरूक हो रही है।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि युवाओं की सोच अब केवल पढ़ाई-लिखाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे समाज में हो रही गड़बड़ियों पर खुलकर सवाल उठाने में सक्षम हैं। यह लोकतंत्र की शक्ति का भी परिचायक है कि मंच चाहे शैक्षणिक हो या राजनीतिक, सच्चाई की आवाज कहीं भी उठ सकती है।







