सरकारी टेंडर लेने के लिए कलंकित कंपनी किस स्तर तक जुगत लगा सकती है यहां छत्तीसगढ़ में देखने को मिल रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि पिछले 7 सालों से छत्तीसगढ़ में मरीजों की सेवा के लिए संचालित संजीवनी 108 एम्बुलेंस जय अंबे सर्विसेज कंपनी चला रही है। इन वर्षों में इस कंपनी को लेकर ढेरों शिकायतें रही हैं। अदालत तक लोग पहुंचे है।आपको आश्चर्य होगा कि 2 साल पहले इसका 108 एंबुलेंस संचालित करने का टेंडर समाप्त हो चुका है बावजूद नया टेंडर नहीं होने की वजह से पिछले 2 साल से यही कंपनी इस आवश्यक सेवा को संचालित कर रही है। और इनका प्रयास है कि ऐसा ही सब कुछ चलता रहे।
हाईकोर्ट बिलासपुर ने कई दफा संजीवनी एंबुलेंस 108 की सेवाओं को लेकर नाराजगी जताई है और छत्तीसगढ़ सरकार को फटकारा है। इस बात को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी स्वास्थ्य सचिव से 108 एंबुलेंस सेवा बेहतर बनाने की निर्देश दिए थे। बावजूद यही कंपनी सरकारी सिस्टम की कमी कमजोरी का फायदा उठाकर 2 साल से मौज कर रही है। अस्पतालों के बाहर 108 एंबुलेंस खड़ी दिखती है और मीटर घूम रहा है। यहां लगभग 100 करोड़ का खेला यहां हो चुका है।
अब इसमें एक नया ट्विस्ट है। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया जिनकी ईमानदारी के चर्चे पूरे देश में रहते हैं उन्होंने मुख्यमंत्री की मंशानुरूप अबकी बार किसी अच्छी और साफ सुथरी कंपनी को ही संजीवनी 108 का टेंडर मिले ताकि राज्य की बीमार जनता को बेहतर सुविधा मिल सके इसके लिए टेंडर के नियम शर्तों को कड़ा बनाया है।
यहां पर साफ सुथरी कंपनी इसलिए कहा क्योंकि जय अंबे सर्विसेज को लेकर शिकायतें बहुत है तथा इस संस्था से संबद्ध एक पूर्व डायरेक्ट जोगिंदर सिंह कोयला घोटाले में आरोपी है। साथ ही इनकम टैक्स चोरी के बाद 30 करोड़ सरेंडर इसी कंपनी ने किया है।
अब यहां पर मुद्दा यह भी है कि सीजीएमएससी में जब भी संजीवनी 108 एंबुलेंस को लेकर टेंडर लगता है तो नियम शर्तों को लेकर कोई ना कोई शिकायत कर दी जाती है। और प्रक्रिया में टेंडर उलझकर रह जाता है। इस बार एक कथित सामाजिक संस्था के नाम से टेंडर प्रक्रिया की नियम,शर्तों और कड़ाई को लेकर पीएमओ में शिकायत की गई है। और यह दुहाई दी गई है कि छोटी कंपनियां को बाहर करने का यह षड्यंत्र है। जबकि सच्चाई यह है कि कोई षडयंत्र नहीं बल्कि दागियों को बाहर रखने के लिए कड़े नियम बनाए गए है। हालांकि यह टेंडर अमित कटारिया के अलावा किसी और के जिम्मे होता तो एक बार मान भी लिया जाता कि वाकई यह षड्यंत्र है परंतु ईमानदारी के पर्याय अमित कटारिया के जिम्मे ये है ऐसे में पीएमओ में की गई शिकायत का कोई औचित्य नहीं है।
यहां कथित सामाजिक संस्था द्वारा की गई शिकायत को लेकर पूरी तरह से संदेह जय अंबे सर्विसेज पर है। क्योंकि उनके ही हाथों से 108 संजीवनी एंबुलेंस का काम वापस लिए जाने की आशंका है। परंतु उन्हें शायद यह नहीं पता कि कटारिया की काट उनके पास नहीं है।
छत्तीसगढ़ में 108 एम्बुलेंस सेवा के टेंडर को लेकर उठे विवाद ने सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह विवाद न केवल एक महत्वपूर्ण जनसेवा से जुड़ा है, बल्कि इसमें एक ऐसी कंपनी का नाम भी सामने आ रहा है जिस पर वित्तीय अनियमितताओं और आपराधिक गतिविधियों के गंभीर आरोप हैं।
जय अंबे सर्विसेज पर लगे गंभीर आरोप
यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि संजीवनी 108 एम्बुलेंस सेवा का संचालन पिछले 7 सालों से “जय अंबे सर्विसेज” नामक एक कंपनी द्वारा किया जा रहा था। इस अवधि में सेवा की गुणवत्ता को लेकर कई शिकायतें सामने आईं। सबसे गंभीर बात यह है कि कंपनी का टेंडर दो साल पहले ही खत्म हो चुका था, फिर भी उसे यह काम सौंपा गया था।
जय अंबे सर्विसेज को एक “कलंकित कंपनी” बताया गया है। इस संस्था से संबद्ध एक पूर्व डायरेक्ट जोगिंदर सिंह पर कोयला घोटाले में आरोपी होने का आरोप है, और कंपनी ने खुद 30 करोड़ रुपये की इनकम टैक्स चोरी स्वीकार की है। ये आरोप इस बात की पुष्टि करते हैं कि कंपनी का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद संदिग्ध रहा है।
मुख्यमंत्री की मंशा और टेंडर प्रक्रिया में रुकावट
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस सेवा को एक ईमानदार कंपनी को सौंपने की मंशा जताई है, ताकि राज्य की जनता को बेहतर सुविधा मिल सके। हालांकि, इस बार की टेंडर प्रक्रिया में भी रुकावट डालने की कोशिश की गई है। एक तथाकथित सामाजिक संस्था ने सख्त टेंडर शर्तों को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में शिकायत की है, यह आरोप लगाते हुए कि यह छोटी कंपनियों को बाहर करने की एक सुनियोजित साजिश है।
इस पूरे मामले में यह संदेह जताया जा रहा है कि यह शिकायत जय अंबे सर्विसेज की ही एक चाल हो सकती है, जो इस महत्वपूर्ण काम को खोने की आशंका से डरी हुई है। यह स्थिति दिखाती है कि कैसे जन-कल्याण से जुड़े टेंडर में भी निहित स्वार्थों का टकराव होता है।
पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता
यह पूरा मामला सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर करता है, खासकर जब बात लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी हो। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी महत्वपूर्ण सेवाएं केवल उन कंपनियों को सौंपी जाएं जिनका रिकॉर्ड साफ-सुथरा और विश्वसनीय हो, ताकि जनता को मिलने वाली सुविधाओं की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।







