भाजपा से लंबे समय से जुड़ी नेत्री अर्चना भट्ट ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने इस्तीफे के बाद पार्टी संगठन पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि भाजपा में महिलाओं को उचित सम्मान नहीं मिलता। वर्षों से उन्हें उपेक्षा और अपमान का सामना करना पड़ा, जिसके चलते यह निर्णय लेना पड़ा।
अर्चना भट्ट ने स्पष्ट कहा कि भाजपा में वही महिलाएं आगे बढ़ सकती हैं जिनके पास मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि हो या जो किसी विशेष “सिंडिकेट” से जुड़ी हों। साधारण परिवार की महिलाएं, जिनके पास राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है, उनके लिए संगठन में आगे बढ़ने की कोई संभावना नहीं होती।
करीब 18 वर्षों तक पार्टी से जुड़े रहने के बावजूद अर्चना भट्ट को हाशिए पर रखा गया। उन्होंने कहा कि बार-बार उन्हें यह महसूस कराया गया कि एक साधारण महिला के लिए संगठन में कोई जगह नहीं है। इससे उनका मनोबल टूटता रहा और अंततः उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
सिर्फ महिला मुद्दे ही नहीं, बल्कि अर्चना भट्ट ने अपने समाज की उपेक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भट्ट समाज को आज भी राजनीति में उचित स्थान नहीं दिया जा रहा है। इस उपेक्षा से समाज के लोग हाशिए पर रह गए हैं।
उनका इस्तीफा केवल व्यक्तिगत असंतोष का परिणाम नहीं है, बल्कि यह उन महिलाओं और छोटे समाजों की आवाज भी है जो राजनीति में अपनी पहचान और सम्मान की तलाश में संघर्ष कर रहे हैं। यह कदम भाजपा के भीतर संगठनात्मक व्यवस्था और महिलाओं की स्थिति पर नए सवाल खड़े करता है।







