रायपुर। छत्तीसगढ़ की बिलासपुर स्थित NIA विशेष अदालत ने केरल की दो कैथोलिक संन्यस्ताओं—प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस, एवं स्थानीय आदिवासी युवक सुखमन मंडावी को मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण के आरोप में सशर्त जमानत प्रदान की है। ये तीनों 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किए गए थे।
अदालत के निर्देश और शर्तें
NIA कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:
- प्रत्येक आरोपी को ₹50,000 का व्यक्तिगत बांड भरना होगा।
- दो स्थानीय गारंटर पेश करने होंगे।
- पासपोर्ट न्यायालय में जमा करना अनिवार्य है।
- विदेश यात्रा पर रोक लगाई गई है।
- मामले की जांच में पूर्ण सहयोग देना होगा।
न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी ने आदेश देते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से हिरासत की विशेष मांग नहीं की गई और आरोपियों के खिलाफ कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं पाई गई। उन्होंने यह भी माना कि आरोपों के पीछे प्रथम दृष्टया कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं।
️ बयान बदला, मामला पलटा
जिस महिला ने पहली शिकायत दर्ज कराई थी, उसने कोर्ट में बताया कि दोनों ननों के खिलाफ लगाए गए आरोप दबाव और भय में आकर दिए गए थे।
स्थानीय रिक्शा चालक, जिसे कथित तौर पर गवाह बताया गया था, उसने भी कहा कि उसने किसी धर्मांतरण गतिविधि की पुष्टि नहीं की।
युवतियों के आरोप और सफाई
तीन युवतियों ने पहले यह आरोप लगाए थे कि उन्हें एक कमरे में कई दिन तक बंद करके मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया गया, और उनके निजी अंगों को छूने का प्रयास भी हुआ।
हालांकि ननों की रिहाई के बाद, उन्होंने एसपी कार्यालय में दिए गए आवेदन में कहा कि ये आरोप झूठे और दबाव में दिए गए थे।
राजनीतिक और धार्मिक प्रतिक्रियाएं
इस पूरे मामले पर राजनीतिक और धार्मिक प्रतिक्रियाएं तीव्र रहीं।
कांग्रेस और UDF नेताओं ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया।
AICC महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने मामला पूरी तरह खारिज करने की मांग की।
केरल में चर्च और आर-पार्टी द्वारा प्रदर्शन और रैलियाँ की गईं।
कार्डिनल बेसिलियस ने कहा,
“यह पहला अध्याय खत्म हुआ है। हमें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है और हम अंतिम फैसले तक लड़ाई जारी रखेंगे।”







