छत्तीसगढ़, जो कि भारत का एक महत्वपूर्ण राज्य है, इन दिनों धार्मिक तनाव के चलते सुर्खियों में है। हाल ही में राज्य की राजधानी रायपुर समेत दुर्ग और कांकेर में तीन ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिनमें ईसाई समुदाय को निशाना बनाया गया। इन घटनाओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था और धार्मिक स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहली घटना रायपुर की है, जहाँ सरकार ने यह कहते हुए 100 साल पुरानी ज़मीन को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की कि उसका लीज़ समाप्त हो गया है। यह ज़मीन ईसाई समुदाय के पास थी, और सरकार के इस कदम को समुदाय ने अपनी धार्मिक और सामाजिक पहचान पर हमला माना।
दूसरी घटना दुर्ग में हुई, जहाँ हिंदू संगठनों के विरोध के बाद प्रशासन ने दो कैथोलिक ननों को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई जब वहां धार्मिक कार्यक्रम चल रहा था, और इसके पीछे धार्मिक असहिष्णुता का संदेह जताया जा रहा है।
तीसरी और सबसे चिंताजनक घटना कांकेर जिले में घटी, जहाँ एक आदिवासी व्यक्ति, जिसने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था, की मृत्यु के बाद उसे उसकी ही ज़मीन पर दफनाने से स्थानीय ग्रामीणों और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। हालात इतने बिगड़े कि शव को कब्र से निकालकर मुर्दाघर में रखना पड़ा। पोस्टमार्टम के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा कि शव का क्या किया जाए।
इन घटनाओं ने देशभर में हलचल मचा दी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह न्याय नहीं, भाजपा-आरएसएस की भीड़तंत्र है। धार्मिक स्वतंत्रता एक संवैधानिक अधिकार है।” इसके ज़रिये उन्होंने स्पष्ट रूप से राज्य सरकार पर धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाया।







