छत्तीसगढ़ में महिला और बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें वे धान के खेत में कुर्सी पर बैठकर रोपा के लिए धान का थहरा उखाड़ती नजर आ रही हैं। इस तस्वीर को लेकर इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है — कुछ लोग इसे जनसेवा का प्रतीक बता रहे हैं, तो कुछ इसे एक और “पब्लिसिटी स्टंट” करार दे रहे हैं।
तस्वीर में मंत्री जी खेत में साड़ी और स्कार्फ के साथ पूरी तरह पारंपरिक परिधान में दिख रही हैं, लेकिन खास बात यह है कि वे पानी भरे खेत में एक प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठकर काम कर रही हैं, जबकि बगल की अन्य महिलाएं कीचड़ में बैठकर धान रोप रही हैं। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या यह सिर्फ कैमरे के लिए किया गया प्रदर्शन है या वास्तव में मंत्री जनता से जुड़ने का प्रयास कर रही हैं?

गौरतलब है कि इससे पहले मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का एक वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमें वे ‘Push और Pull’ जैसे शब्दों को लेकर चर्चा में आ गई थीं। अब खेत वाली तस्वीर ने एक बार फिर उन्हें सुर्खियों में ला दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जनता के बीच पहुंचना एक अच्छी बात है, लेकिन यदि यह सिर्फ कैमरे और प्रचार के लिए हो, तो उसका प्रभाव उल्टा पड़ सकता है। जनता अब फोटोशूट और असली सेवा में फर्क समझने लगी है।
खेत की कीचड़ में पैर नहीं, कैमरे के लिए कुर्सी रखी गई है — सवाल यह है कि क्या यह जनसेवा है या नौटंकी?



