हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें एक नेता के बेटे और उसके रसूखदार दोस्तों ने महंगी गाड़ियों के काफिले को बिलासपुर-रायपुर नेशनल हाईवे पर खड़ा करके रील बनाई और उसे इंस्टाग्राम पर साझा किया। इस वीडियो में दिखाया गया कि रील बनाते समय सड़क पर जाम लगा रहा, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस मामले पर कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और इसे कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया।
मुख्य सचिव को इस मामले में शपथ पत्र के साथ जवाब देने के लिए कहा गया है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि पुलिस ने केवल जुर्माना वसूलकर और ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त करने का प्रस्ताव भेजकर मामले को हल्का क्यों किया? गाड़ियाँ जब्त क्यों नहीं की गईं?
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि बार-बार सार्वजनिक स्थानों पर इस प्रकार की घटनाएं दोहराई जा रही हैं। न्यायालय ने कहा कि यह न केवल खुद की जान को खतरे में डालने वाला कृत्य है, बल्कि दूसरों की जिंदगी से भी खिलवाड़ है।
न्यायालय ने यह भी कहा कि जब कोई रसूखदार व्यक्ति या उसका बेटा इस तरह की हरकत करता है, तो पुलिस की नरमी और भी चिंताजनक हो जाती है। सिर्फ जुर्माना लगाना या लाइसेंस निरस्त करना पर्याप्त नहीं है। जब तक गाड़ियों को जब्त नहीं किया जाएगा या मोटर व्हीकल एक्ट की सख़्त धाराएं नहीं लगाई जाएंगी, तब तक ऐसे मामलों में सुधार संभव नहीं है।
यह घटना सिर्फ कानून व्यवस्था की कमजोरी को उजागर नहीं करती, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि क्या आम नागरिक और रसूखदार लोगों के लिए अलग-अलग कानून हैं? अदालत ने मामले की गंभीरता को समझते हुए प्रशासन से सख़्त कार्रवाई की उम्मीद जताई है।







