रायपुर।छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की ईडी द्वारा गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। शनिवार को कांग्रेस ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए, वहीं रविवार को भाजपा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर पलटवार किया और कई दस्तावेज प्रस्तुत कर भूपेश बघेल पर तीखा हमला बोला।
भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में राज्य के वन मंत्री केदार कश्यप ने दावा किया कि जिन कोयला खदानों और जंगलों की कटाई को लेकर कांग्रेस भाजपा पर सवाल उठा रही है, उनकी अनुमति खुद भूपेश सरकार ने दी थी। उन्होंने कहा कि बघेल अपने बेटे की गिरफ्तारी से बौखलाहट में तथ्य छुपाकर जनता को गुमराह कर रहे हैं।
केदार कश्यप ने बताया कि कांग्रेस सरकार ने ही 16 अक्टूबर 2019 को गारे पेलमा सेक्टर-2 कोल ब्लॉक के लिए पर्यावरणीय मंजूरी की सिफारिश की थी। इसके बाद 31 मार्च 2021 को इस खदान के लिए समझौता हुआ, और 2022-23 में स्टेज-1 और स्टेज-2 की वन स्वीकृति की सिफारिश भी कांग्रेस सरकार ने भेजी थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि 2010 में केंद्र में कांग्रेस सरकार ने हसदेव अरण्य को ‘नो गो जोन’ से ‘गो एरिया’ में बदलने की शुरुआत की थी, ताकि कोयला खनन का रास्ता साफ हो सके। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारों ने ही अडानी ग्रुप को कई कोल ब्लॉकों में ऑपरेटर की भूमिका दी।
प्रेस वार्ता में संजय श्रीवास्तव, सौरभ सिंह, पंकज झा और अमित चिमनानी भी मौजूद थे। कश्यप ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि “भूपेश बघेल कोल ब्लॉक आवंटन पर सवाल उठाने वालों से कहते थे कि बिजली बंद कर दें, अब वही झूठे आरोपों से खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। क्या अब वे अपने घर और राजीव भवन की बिजली बंद करेंगे?”
भाजपा नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शराब, कोयला, चावल, पीएससी और गोठान घोटालों के ज़रिए प्रदेश की संपत्तियों की लूट हुई। अब एक-एक कर इन मामलों में आरोपी कानून के शिकंजे में आ रहे हैं और कांग्रेस इसे “राजनीतिक बदले” का नाम देकर भ्रम फैला रही है।



