मुंबई।महाराष्ट्र में शिक्षा के माध्यम को लेकर नई बहस छिड़ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि राज्य में जबरन त्रिभाषा नीति लागू करने की कोशिश हुई, तो वे इसका पुरजोर विरोध करेंगे। विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन मीडिया से बातचीत में ठाकरे ने यह बयान दिया।
उन्होंने कहा कि राज्य के मराठी और अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में हिंदी भाषा को अनिवार्य बनाने के प्रयास हो रहे हैं, जो राज्य की भाषाई विविधता और मराठी अस्मिता पर सीधा हमला है। ठाकरे ने कहा कि “महाराष्ट्र में कोई भी भाषा किसी पर थोपी नहीं जानी चाहिए, विशेषकर हिंदी। अगर सरकार दबाव बनाएगी, तो हम सड़क से सदन तक विरोध करेंगे।”
विधानसभा में हुई झड़प पर जताई नाराजगी
उद्धव ठाकरे ने विधानसभा की लॉबी में भाजपा और एनसीपी (शरद पवार गुट) के समर्थकों के बीच हुई तीखी झड़प को शर्मनाक बताते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं राज्य की छवि को धूमिल करती हैं। उन्होंने कहा कि “यह लोकतंत्र के मंदिर में हिंसा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”
गठबंधन सरकार पर निशाना
ठाकरे ने मौजूदा शासक गठबंधन पर तंज कसते हुए कहा कि सत्ता के नशे में डूबे नेता अब शिष्टाचार और मर्यादा भूल चुके हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र हमेशा से सुसंस्कृत राजनीतिक संवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक रहा है, लेकिन मौजूदा स्थिति चिंताजनक है।
यूपी-बिहार पर संतुलित टिप्पणी
जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या महाराष्ट्र में बढ़ती अव्यवस्था उत्तर प्रदेश और बिहार जैसी है, तो ठाकरे ने संयमित लहजे में कहा, “हर राज्य में अच्छे लोग होते हैं। कुछ घटनाओं के आधार पर पूरे राज्य को गलत ठहराना अनुचित है।”
सरकार को चेतावनी और निष्पक्ष जांच की मांग
उद्धव ठाकरे ने सरकार को आगाह किया कि भाषा के नाम पर यदि जबरन नीतियां थोपी गईं, तो व्यापक विरोध देखने को मिलेगा। साथ ही उन्होंने विधानसभा में हुई झड़प की निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा कि ऐसे मामलों में कोई पक्षपात नहीं होना चाहिए।







