रायपुर।छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी उस वक्त हुई जब ईडी की टीम ने भिलाई स्थित बघेल परिवार के निवास पर छापेमारी की। इसी दिन चैतन्य का जन्मदिन भी था।
ईडी ने छापेमारी के दौरान दस्तावेज और डिजिटल सबूतों को जब्त किया। इस बीच बघेल निवास के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जुट गई, जिन्होंने ईडी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए गाड़ियों को रोकने की कोशिश की। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
पूर्व सीएम भूपेश बघेल का तीखा वार
भूपेश बघेल ने इस कार्रवाई को केंद्र की बदले की राजनीति करार देते हुए सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोला। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा –
“जन्मदिन पर ऐसा तोहफा किसी और लोकतंत्र में नहीं मिलता। मेरे जन्मदिन पर ईडी ने मेरे सलाहकारों के घरों पर छापा मारा और आज बेटे के जन्मदिन पर मेरे घर ईडी आ धमकी। ये एहसान ताउम्र याद रहेगा।”

‘अडाणी परियोजना’ से जोड़ा मामला
बघेल ने ईडी की कार्रवाई को रायगढ़ के तमनार क्षेत्र में चल रही अडाणी समूह की कोयला खदान परियोजना से भी जोड़ा। उन्होंने लिखा –
“आज विधानसभा सत्र का अंतिम दिन है, जब तमनार के जंगलों की कटाई का मुद्दा उठाया जाना था। इसी दिन ईडी भेज दी गई।”
उल्लेखनीय है कि बघेल हाल ही में तमनार पहुंचे थे और स्थानीय ग्रामीणों के साथ खदान परियोजना का विरोध किया था।
ईडी के आरोप – शराब घोटाले में मिली रकम
ईडी के मुताबिक, शराब घोटाले के जरिए राज्य के खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया और करीब ₹2,100 करोड़ की अवैध कमाई की गई। एजेंसी को संदेह है कि चैतन्य बघेल को भी इस घोटाले से लाभ मिला।
पहले से चल रही जांच में कई गिरफ्तार
इस घोटाले के संबंध में पहले ही कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री कवासी लखमा, रायपुर के मेयर के भाई अनवर ढेबर, पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, और दूरसंचार सेवा के अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
घोटाले की पृष्ठभूमि
यह कथित घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ बताया गया है। ईडी ने पहले की प्राथमिकी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बाद नए सबूतों के आधार पर ईओडब्ल्यू / एसीबी से प्राथमिकी दर्ज करवाई। इस नई एफआईआर में 70 व्यक्तियों और कंपनियों के नाम शामिल हैं, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले लोग भी हैं।



