न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर उपराष्ट्रपति धनखड़ का बड़ा बयान, उठाया स्व-निरीक्षण का मुद्दा

Madhya Bharat Desk
2 Min Read

उप राष्ट्रपति धनकड़ जी के बयान:

उप राष्ट्रपति जगदीप धनकड़ जी ने कई मौकों पर न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को लेकर चिंता जाहिर की है। यह एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा उठाया गया गंभीर मुद्दा है, और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। जब उच्च संवैधानिक पदधारी ऐसी बातें सार्वजनिक रूप से कहते हैं, तो यह न्यायपालिका को आत्मनिरीक्षण के लिए बाध्य करता है।

 न्यायपालिका की ज़िम्मेदारी:

हां, यदि न्यायपालिका पर भ्रष्टाचार का “दाग” लगा है, तो उसे साफ करने की ज़िम्मेदारी सबसे पहले खुद न्यायपालिका की ही है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट्स को ऐसे मामलों में त्वरित, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए — ताकि ना केवल दोषी को दंड मिले, बल्कि निर्दोष को भी क्लीन चिट मिले और लोगों का विश्वास कायम रहे।

 जस्टिस यशवंत वर्मा के संदर्भ में:

“जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने के लिए इंपीचमेंट मोशन या इस्तीफा” इसपर दो बातें साफ होनी चाहिए:

यदि उनके खिलाफ ठोस सबूत हैं, तो सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेकर जांच करानी चाहिए।

इंपीचमेंट (महाभियोग) एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जो संसद में ही शुरू होती है और बहुत ही कठिन और दुर्लभ होती है। इस प्रक्रिया से पहले न्यायपालिका यदि स्वयं कदम उठाए (जैसे जांच या इस्तीफे की मांग), तो यह संस्थान की गरिमा को भी बचा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट की प्रतिष्ठा राष्ट्र की न्याय व्यवस्था की आत्मा है। यदि कोई न्यायाधीश दोषी पाया जाता है, तो सुप्रीम कोर्ट को न केवल उससे इस्तीफा लेना चाहिए, बल्कि एक मजबूत संदेश देना चाहिए कि “कानून सबके लिए समान है” — चाहे वह आम नागरिक हो या कोई न्यायाधीश।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment