कैंसर स्क्रीनिंग के आंकड़ों में बड़ी गड़बड़ी: 2 साल की बच्चियों की ब्रेस्ट-सर्वाइकल जांच

Madhya Bharat Desk
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छत्तीसगढ़ में कैंसर की समय पर पहचान के लिए चलाए जा रहे स्क्रीनिंग अभियान के आंकड़ों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। स्वास्थ्य विभाग की अपनी ही प्रदर्शन रिपोर्ट में दो साल तक की बच्चियों की ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग दर्ज मिली है, जबकि सरकारी नियमों के अनुसार इन जांचों के लिए 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र निर्धारित है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दुर्ग जिले के धमधा, बालोद के गुंडरदेही, कबीरधाम के कुकदुर, सरगुजा के लखनपुर और अंबिकापुर के रेवपुर क्षेत्र में दो साल तक की बच्चियों की ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग दर्ज है। इसके अलावा जशपुर के बगीचा क्षेत्र में एक साल के बच्चे की ओरल कैंसर स्क्रीनिंग का भी रिकॉर्ड दर्ज मिला है।

ऐप में कम उम्र की एंट्री संभव नहीं

सवाल यह है कि जब स्क्रीनिंग का डेटा दर्ज करने वाले सरकारी ऐप में 30 साल से कम उम्र के व्यक्ति की एंट्री आगे बढ़ाने का विकल्प ही नहीं खुलता, तो एक-दो साल के बच्चों की जांच सिस्टम में कैसे दर्ज हुई। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ का दावा है कि ऐसी एंट्री केवल एडमिन स्तर पर संभव है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की दिशा-निर्देशों में भी स्तन, गर्भाशय ग्रीवा और मुख कैंसर की जनसंख्या-आधारित जांच 30 से 65 वर्ष की आयु के लोगों के लिए तय है। इसलिए इतनी कम उम्र के बच्चों की स्क्रीनिंग का रिकॉर्ड सीधे तौर पर डेटा की प्रामाणिकता पर सवाल खड़ा करता है।

एक नंबर पर हजारों जांचें

मामला केवल उम्र तक सीमित नहीं है। नक्सल प्रभावित बीजापुर और सुकमा में कुछ चुनिंदा मोबाइल नंबरों पर हजारों लोगों की स्क्रीनिंग दर्ज की गई है। बीजापुर में एक डमी नंबर पर 263 जांचें दर्ज हैं, जबकि सुकमा में एक नंबर पर 2,720, दूसरे पर 1,382 और तीसरे पर 1,611 एंट्री दर्ज मिली हैं।

इन चार नंबरों पर कुल 5,976 स्क्रीनिंग एंट्री दर्ज होने से यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें साझा संपर्क नंबर के रूप में इस्तेमाल किया गया या बिना वास्तविक जांच के रिकॉर्ड बनाए गए। हालांकि, एक ही नंबर पर इतनी बड़ी संख्या में एंट्री अभियान की मॉनिटरिंग और डेटा सत्यापन व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाती है।

नोडल अधिकारी ने मानी गड़बड़ी

दुर्ग जिले के एनसीडी कार्यक्रम के नोडल अधिकारी ने धमधा क्षेत्र में डेटा गड़बड़ी मानते हुए संबंधित लोगों को सुधार के लिए नोटिस जारी किया है। धमधा की ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर ने कहा है कि 30 साल से अधिक उम्र के लोगों की ही स्क्रीनिंग होनी चाहिए और इस मामले की जांच कराई जाएगी।

स्क्रीनिंग से जुड़ा डेटा ग्रामीण स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी दर्ज करते हैं, जिसके बाद उसे जिला स्तर पर समीक्षा के लिए भेजा जाता है। ऐसे में गड़बड़ियों को रोकने के लिए फील्ड एंट्री, जिला स्तर की समीक्षा और राज्य स्तर की मॉनिटरिंग तीनों परतों पर जिम्मेदारी तय करना जरूरी हो गया है।

बढ़ते कैंसर मामलों के बीच सवाल

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब छत्तीसगढ़ में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल 2024 से जून 2026 के बीच प्रदेश में 17,611 नए कैंसर मामले सामने आए, जिनमें सबसे अधिक 4,465 मुख कैंसर के हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि प्रदेश में औसतन प्रतिदिन 43 लोगों की कैंसर से मौत हो रही है।

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