‘अर्नब’ चक्रवात के बाद अब ‘मुरासु’ ने आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों पर दस्तक देनी शुरू कर दी है। मौसम विभाग के अनुसार, तूफान ओंगोल के पास नेल्लोर और नरसापुर के बीच तट पर पहुंचा है, जहां हवाएं 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हैं और झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।
चक्रवात मुरासु बंगाल की खाड़ी में गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में सक्रिय हो गया था। मौसम विभाग ने पूर्वानुमान दिया था कि यह 2 नवंबर की रात 11:30 बजे से 3 नवंबर की सुबह 4 बजे के बीच आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट पर लैंडफॉल करेगा।
आपदा की तैयारी के लिए पांच राज्यों में एनडीआरएफ की कुल 37 टीमें तैनात की गई हैं। इनमें सबसे बड़ा फोकस तटीय आंध्र प्रदेश पर है, जहां 13 टीमें पहले से तैनात की गई हैं।
तूफान के असर से आंध्र प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने तटीय क्षेत्रों में लगभग 1 से 1.5 मीटर ऊंची समुद्री लहरों से निचले इलाकों के जलमग्न होने की चेतावनी भी दी है।
छत्तीसगढ़ में भी मुरासु का असर दिख सकता है। मौसम विभाग ने 2 से 4 नवंबर के बीच कई जिलों के लिए यलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किए हैं; कांकेर और धमतरी समेत कई जिलों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है।
इससे पहले आए चक्रवात ‘अर्नब’ के बाद लगातार दूसरे तूफान ने बंगाल की खाड़ी के तटीय राज्यों की चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन ने बचाव, राहत और बिजली बहाली के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं, जबकि तटीय क्षेत्रों में मछली पकड़ने और समुद्री परिचालन पर रोक लगाई गई है।





