छत्तीसगढ़ में चक्रवात ‘अर्नब’ के कारण हो रही भारी बारिश ने बालोद जिले के 106 वर्ष पुराने ऐतिहासिक तांदुला डेम को ओवरफ्लो कर दिया है। बंगाल की खाड़ी से उठे इस चक्रवाती तूफान ने पिछले तीन दिनों से लगातार मूसलाधार बारिश बरसाई है, जिसके चलते तांदुला जलाशय 38.50 फीट तक भरकर छलक गया है।
तांदुला डेम छत्तीसगढ़ के तीन जिलों की जीवनदायिनी परियोजना मानी जाती है, जो सिंचाई, पेयजल और भिलाई इस्पात संयंत्र की जरूरतें पूरी करती है। डेम के ओवरफ्लो होने की खबर फैलते ही आसपास के गांवों और शहरों से बड़ी संख्या में पर्यटक तांदुला बांध के किनारे पहुंचने लगे हैं। लोग दूर-दूर से इस नजारे को देखने के लिए उमड़ पड़े हैं और पानी की अठखेलियां देख रहे हैं।
इससे पहले तांदुला जलाशय अगस्त 2013, 2014, 2018 और 2022 में ओवरफ्लो हो चुका है। 2022 के बाद 2025 में फिर ओवरफ्लो हुआ था, और अब 2026 में चक्रवात ‘अर्नब’ के कारण फिर से यह नजारा देखने को मिला है।
चक्रवात ‘अर्नब’ के असर से बस्तर संभाग और आसपास के जिलों में भारी तबाही मची है। लगातार बारिश के चलते बालोद जिले में 25 सितंबर को सभी स्कूलों को बंद रखा गया था, और जलनिकासी की नालियां अवरुद्ध होने से शहर के कुछ हिस्सों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन ने नदी तटों और निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया है।
प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे बांध के किनारे सुरक्षित दूरी बनाए रखें और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें। भीड़ को नियंत्रित करने और नदी किनारे अतिरिक्त चौकसी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।






