रायगढ़ के सक्ती स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे ने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। अब इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत करीब 10 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर के मुताबिक, डभरा थाने में प्लांट प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों पर मामला दर्ज किया गया है। FIR में प्लांट हेड देवेंद्र पटेल का नाम भी शामिल है।
इस दर्दनाक हादसे में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। हादसे में झुलसे 36 मजदूरों में से 16 का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जारी है। मरने वालों में छत्तीसगढ़ के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के मजदूर शामिल हैं जो रोज़ी-रोटी के लिए यहां आए थे, लेकिन घर लौट नहीं सके।
घटना के बाद जब औद्योगिक सुरक्षा विभाग की टीम मौके पर पहुंची, तो शुरुआती जांच में गंभीर लापरवाही सामने आई। बताया जा रहा है कि उत्पादन बढ़ाने की जल्दबाजी में सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज किया गया। बॉयलर में खराबी की चेतावनी पहले ही मिल चुकी थी, लेकिन काम नहीं रोका गया और यही लापरवाही इतनी बड़ी त्रासदी में बदल गई।
इस घटना के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की है।
वहीं, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी दुख व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये देने का ऐलान किया है। कंपनी वेदांता ग्रुप ने भी अपनी ओर से मृतकों के परिजनों को 35 लाख रुपये और घायलों को 15 लाख रुपये देने की घोषणा की है।
लेकिन इन घोषणाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है क्या मुआवजा उन घरों की खाली हुई जगह भर पाएगा, जहां अब कभी कोई लौटकर नहीं आएगा?



