IIT बॉम्बे में प्रोफेसर दुल्ला के समर्थन में छात्र, कवरेज पर उठे सवाल

Madhya Bharat Desk
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IIT बॉम्बे में प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला के समर्थन में भी छात्रों की आवाज लगातार मजबूत हो रही है। लेकिन मीडिया इस समर्थन को उतनी तवज्जो नहीं दे रही, जितनी उनके विरोध में उठने वाले शोर को दे रही है। इस वजह से कवरेज पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

छात्रों ने साफ किया है कि उनका रुख परीक्षा में नकल के समर्थन में नहीं है। उनका विरोध छात्र साहिल वाकोडे की मौत, संस्थान की जवाबदेही और व्यवस्था में सुधार को लेकर है। साथ ही, वे जांच पूरी होने से पहले प्रोफेसर दुल्ला को दोषी मानने के पक्ष में भी नहीं हैं।

प्रोफेसर के समर्थन में IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने भी बयान जारी किया है। फैकल्टी ने उन्हें अपना सहयोगी बताते हुए समर्थन दिया और उनके पक्ष में संस्थान परिसर में मार्च निकाला।

फैकल्टी फोरम के अनुसार, प्रोफेसर दुल्ला को संस्थान से निलंबित नहीं किया गया है। उन्हें केवल डीन के प्रशासनिक पद से हटाया गया है, ताकि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से हो सके। वे अब भी संस्थान के फैकल्टी सदस्य हैं।

अब सवाल यह है कि जब एक पक्ष के आरोपों और विरोध को लगातार जगह मिल रही है, तो प्रोफेसर के समर्थन में खड़े छात्रों और शिक्षकों की बात उतनी प्रमुखता से क्यों नहीं दिखाई जा रही? क्या खबरों में केवल शोर ही महत्वपूर्ण है, या शांत और तर्कपूर्ण पक्ष को भी समान जगह नहीं मिलनी चाहिए?

नकल का समर्थन नहीं किया जा सकता और छात्र की मौत बेहद दुखद है। लेकिन किसी भी व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले दोषी ठहराना भी सही नहीं है। इस मामले में निष्पक्ष जांच के साथ-साथ निष्पक्ष कवरेज भी जरूरी है।

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