जब नकल रोकने वाला ही आरोपी बने! तो शिक्षा में अनुशासन का क्या?

Madhya Bharat Desk
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नकल करने वाले छात्र पर कार्रवाई गलत और नकल रोकने वाला शिक्षक गलत, तो शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन कैसे बचेगा?

देश के सबसे बड़े शिक्षण संस्थानों में शामिल IIT बॉम्बे के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला जिसने नकल करने से रोका था उसे जाति से जोड़कर राजनीतिक रंग दे दिया गया और उसके खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज करा दिया गया। यह देश की शिक्षा व्यवस्था को और पीछे की ओर धकेलती नजर आ रही है। क्या अब परीक्षाओं में नकल करने से रोकना भी अपराध की श्रेणी में आने लगा है।

प्रोफेसर की योग्यता इतना है कि वे विदेश में लाखों रुपये के वेतन पर नौकरी कर सकते थे, लेकिन उन्होंने देश में रहकर शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने का रास्ता चुना। इसके बावजूद परीक्षा में नकल रोकने के कारण उन्हें विरोध और कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कक्षा 10 में 93.4 प्रतिशत और कक्षा 12 में 97.8 प्रतिशत अंक हासिल किए। उन्होंने नागार्जुन यूनिवर्सिटी से बीटेक, IIT बॉम्बे से एमटेक और IIT दिल्ली से पीएचडी की है। वे JEE Advanced 2022 के आयोजन अध्यक्ष और 2019-20 में उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं।

IIT बॉम्बे के छात्र की मौत के बाद इस मामले को जाति से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रोफेसर पर एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज होने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब शिक्षक परीक्षा में नकल पकड़ने से पहले कई बार सोचेंगे? क्या परीक्षा के नियम समझाना और नकल रोकना किसी प्रोफेसर के लिए कानूनी जोखिम बन जाएगा?

2018 से 2023 के बीच IIT, NIT और IIM में 61 छात्रों के आत्महत्या करने की जानकारी सामने आई है। इनमें 31 छात्र आरक्षित वर्ग और 30 छात्र सामान्य वर्ग से थे। ऐसे में किसी छात्र की मौत को केवल जाति के आधार पर देखना उचित नहीं है।

नकल करना गलत है। आत्महत्या बेहद दुखद है। जातिगत भेदभाव भी गलत है। लेकिन किसी की मौत के आधार पर किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय करने से पहले निष्पक्ष जांच और ठोस सबूत जरूरी हैं। प्रोफ़ेसर ने केवल परीक्षा में नकल रोकने की अपनी जिम्मेदारी निभाई है।

कॉकरोच जनता पार्टी की मंशा पर भी इस मामले को लेकर सवाल उठ रहा है कि जो लोग नीट पेपर लीक रोकने जंतर मंतर पर उतरे थे वही नकल रोकने वाले प्रोफेसर के खिलाफ खड़े होते हैं यह सीजेपी के दोहरे चरित्र को उजागर करता है। यह शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

कानून सुरक्षा के लिए है, डर पैदा करने के लिए नहीं। शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन बनाए रखने के लिए जरूरी है कि नकल करने वाले और नकल रोकने वाले—दोनों के मामलों में निष्पक्षता से फैसला लिया जाए।

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