MP Election Commission पर कमीशनखोरी के आरोप, स्टिंग ऑपरेशन के बाद उच्चस्तरीय जांच की मांग

Madhya Bharat Desk
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मध्य प्रदेश में निर्वाचन व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। वोट चोरी और ईवीएम में अनियमितता के आरोपों के बाद अब निर्वाचन आयोग पर चुनावी व्यवस्थाओं से जुड़े भुगतानों में कथित कमीशनखोरी के आरोप सामने आए हैं।

दैनिक भास्कर के कथित खोजी स्टिंग ऑपरेशन में दावा किया गया है कि विधानसभा चुनाव 2023, लोकसभा चुनाव 2024 और एसआईआर 2025 के दौरान वीडियोग्राफी, वाहनों में जीपीएस और सीसीटीवी जैसी चुनावी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के करोड़ों रुपये के बिल भुगतान के लिए लंबित थे। आरोप है कि इन भुगतानों को मंजूर कराने के एवज में 15 प्रतिशत तक कमीशन मांगा गया।

स्टिंग में निर्वाचन आयोग की बजट शाखा से जुड़े कर्मचारियों, एक निजी बिचौलिए और वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों के कथित नेटवर्क का भी दावा किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।

मामले को लेकर उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई गई है। मांग करने वालों का कहना है कि यदि चुनावी प्रक्रिया में काम करने वाली निजी कंपनियों से भुगतान जारी करने के बदले कमीशन लिया गया है, तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

आरोपों को लेकर यह भी सवाल उठाया गया है कि चुनावी व्यवस्थाओं से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों पर यदि भ्रष्टाचार के आरोप सही पाए जाते हैं, तो इससे निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

मामले में अब निगाहें निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया पर हैं। उच्चस्तरीय जांच होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि स्टिंग में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और कथित कमीशन नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।

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