उर्वरक सुरक्षा पर लोकसभा में सांसद बृजमोहन का बड़ा सवाल, सरकार ने सल्फर उपलब्धता को लेकर दिया अहम जवाब

Madhya Bharat Desk
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नई दिल्ली। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में देश की उर्वरक सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और कृषि क्षेत्र से जुड़े अहम मुद्दे उठाए। उन्होंने सल्फर (गंधक) की उपलब्धता, आयात और भविष्य में इसकी आपूर्ति को लेकर सरकार से जानकारी मांगी। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने बताया कि देश में फॉस्फेटिक एवं पोटाश (P&K) उर्वरकों के लिए हर साल करीब 30 से 35 लाख मीट्रिक टन सल्फर की जरूरत होती है, जबकि सरकार 41.92 लाख मीट्रिक टन सल्फर की उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है।

सरकार ने बताया कि सल्फर का उपयोग सिर्फ उर्वरकों में ही नहीं, बल्कि सल्फ्यूरिक अम्ल, रसायन उद्योग, पेट्रोलियम रिफाइनरी, धातु प्रसंस्करण, रबर उद्योग और कई अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में 419.18 करोड़ किलोग्राम (करीब 41.92 लाख मीट्रिक टन) सल्फर और उससे जुड़े उत्पादों का आयात किया गया। यह वर्ष 2024-25 के 414.43 करोड़ किलोग्राम और 2021-22 के 385.56 करोड़ किलोग्राम से अधिक है। सरकार का कहना है कि यह बढ़ती कृषि और औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप मजबूत आपूर्ति व्यवस्था का संकेत है।

सरकार ने यह भी बताया कि देश की जरूरत पूरी करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कतर, सऊदी अरब, कुवैत, जापान, रूस, कनाडा, इराक सहित कई देशों से सल्फर का आयात किया जा रहा है। हालांकि कंपनीवार आयात की जानकारी वाणिज्यिक गोपनीयता के कारण सार्वजनिक नहीं की जा सकती।

सरकार के मुताबिक, पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों का असर वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ा है, जिससे मालभाड़ा, बीमा लागत और शिपमेंट प्रभावित हुए हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार सल्फर की उपलब्धता पर लगातार नजर बनाए हुए है।

सरकार ने बताया कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के साथ समन्वय कर सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की रिफाइनरियों को उर्वरक उद्योग के लिए सल्फर की आपूर्ति को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। इसके अलावा पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) योजना और ओपन जनरल लाइसेंस (OGL) व्यवस्था के तहत कंपनियों को जरूरत के अनुसार सल्फर और अन्य कच्चे माल की व्यवस्था करने की सुविधा भी दी गई है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि सल्फर केवल एक औद्योगिक कच्चा माल नहीं, बल्कि देश की उर्वरक सुरक्षा, कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संसाधन है। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराना विकसित भारत की दिशा में एक अहम आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि यह संतोष की बात है कि केंद्र सरकार वैश्विक चुनौतियों के बावजूद आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने और देश की उर्वरक आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। साथ ही उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश उर्वरक सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और कृषि क्षेत्र को और अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ता रहेगा।

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