नई दिल्ली।देश की राजनीति इस समय उबाल पर है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राहुल गांधी को राजनीतिक तौर पर छोटा दिखाने की कोशिश में एक “अनजान कॉकरोच” रातों-रात राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया। हालत यह हो गई कि जिस शख्स को देश का बड़ा हिस्सा जानता है, उससे संवाद नहीं; लेकिन जिस “कॉकरोच” को कोई पहचानता भी नहीं था, उससे बातचीत के लिए सरकारी प्रतिनिधि अस्पताल तक पहुँच गए।
लगता है देश में राजनीति का नया अध्याय जुड़ गया है। सरकार अब संवाद की नई नीति पर काम कर रही है, जिसमें विपक्ष के नेता से मिलने का समय निकालना मुश्किल है, लेकिन अस्पताल जाकर “विशेष मेहमानों” से बातचीत करना प्राथमिकता बन गया है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह भारतीय राजनीति का नया मॉडल है—”जो जितना कम जाना-पहचाना, वह उतना बड़ा वार्ताकार!”
उधर सोशल मीडिया पर लोगों ने तंज कसते हुए लिखा,
“लोकतंत्र का नया प्रोटोकॉल जारी हो गया है—विपक्ष से दूरी, कॉकरोच से जरूरी!”
यह देश के सरकार पर पूरी तरह व्यंग्य है, लेकिन सवाल वही पुराना है क्या लोकतंत्र में संवाद का पैमाना अब राजनीतिक महत्व नहीं, बल्कि राजनीतिक सुविधा तय करेगी?





