छत्तीसगढ़ में महंगाई की मार झेल रही आम जनता को आज से बिजली का एक और झटका लगा है। राज्य विद्युत नियामक आयोग की ओर से तय नई बिजली दरें 1 जुलाई से लागू हो गई हैं। अब घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 30 से 50 पैसे तक अधिक भुगतान करना होगा, जबकि गैर-घरेलू उपभोक्ताओं और कृषि पंपों की दरों में भी बढ़ोतरी की गई है।
सरकार की ओर से लंबे समय से बकाया बिजली बिल वाले उपभोक्ताओं को तीन महीने की अतिरिक्त मोहलत, सरचार्ज में छूट और समय पर भुगतान करने पर 10 प्रतिशत की विशेष छूट देने की घोषणा जरूर की गई है, लेकिन बढ़ी हुई बिजली दरों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
देखा जाए तो छत्तीसगढ़ सरकार और बिजली वितरण कंपनी (सीएसपीडीसीएल) उपभोक्ताओं से पूरा बिजली बिल वसूल रही है, लेकिन प्रदेश के कई इलाकों में लोग नियमित बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या से जूझने का आरोप लगाते हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि जब पूरी और निर्बाध बिजली आपूर्ति नहीं मिल रही, तो बढ़े हुए बिल का बोझ क्यों उठाया जाए।
गांवों से लेकर शहरों तक कई जगह बिजली गुल होने की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। ऐसे में नई दरों के लागू होने के बाद लोगों के बीच यह सवाल और तेज हो गया है कि क्या सरकार पहले बिजली व्यवस्था में सुधार करेगी या फिर केवल बिजली की कीमतें बढ़ती रहेंगी।
महंगाई के इस दौर में बढ़े हुए बिजली बिल का असर सबसे ज्यादा गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ने की आशंका है। लोगों का कहना है कि यदि बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो बढ़ी हुई दरें उनके लिए आर्थिक बोझ साबित होंगी और पहले से परेशान आम जनता की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।





