राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र स्थित पुरनिया इलाके के एक कोचिंग सेंटर में सोमवार को भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। आग लगने के बाद पूरी इमारत धुएं से भर गई, जिससे अंदर मौजूद छात्रों में अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने के लिए कई छात्रों को ऊंचाई से छलांग लगानी पड़ी। घटना में कई छात्रों के घायल होने की सूचना है, जबकि राहत और बचाव कार्य देर तक जारी रहा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग तेजी से फैलने लगी, जिसके कारण कोचिंग सेंटर में मौजूद छात्र-छात्राओं को बाहर निकलने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। धुएं के कारण कई छात्र घबरा गए और सुरक्षित निकलने के लिए खिड़कियों तथा ऊपरी मंजिलों से नीचे कूदने लगे। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, प्रशासन और दमकल विभाग की कई टीमें मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने के लिए अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने इमारत को खाली कराकर राहत एवं बचाव कार्य चलाया। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए घायलों के समुचित उपचार के निर्देश दिए हैं। साथ ही पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद कोचिंग सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक स्तर पर यह जांच की जा रही है कि भवन में अग्निशमन के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं। यह भी देखा जा रहा है कि संस्थान के पास फायर सेफ्टी संबंधी आवश्यक अनुमति और प्रमाणपत्र मौजूद थे या नहीं।
जांच के दायरे में निम्न बिंदु प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- क्या भवन में अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था?
- क्या आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की व्यवस्था थी?
- क्या क्षमता से अधिक छात्रों को एक साथ बैठाया जा रहा था?
- क्या संबंधित विभागों ने समय-समय पर निरीक्षण किया था?
- क्या किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों की अनदेखी हुई?
यदि जांच में सुरक्षा मानकों के उल्लंघन या प्रशासनिक लापरवाही की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदारी केवल संस्थान प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि निगरानी करने वाले संबंधित विभागों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है।
संपादकीय दृष्टिकोण
देश के विभिन्न शहरों में पहले भी कोचिंग संस्थानों, व्यावसायिक परिसरों और सार्वजनिक भवनों में आग लगने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इसके बावजूद यदि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है, तो यह चिंता का विषय है। छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इसके लिए अग्नि सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन आवश्यक है।
हालांकि घटना के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारियों का निर्धारण आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन यह हादसा एक बार फिर शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की आवश्यकता को उजागर करता है।





