रायपुर: हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप पर पद के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। कुलसचिव पर आरोप है कि उन्होंने विश्वविद्यालय के शासकीय वाहन (Toyota Etios, क्र. CG-02-6681) को अपनी ‘पारिवारिक टैक्सी’ बना दिया था। इस पूरे खेल का सबसे चौंकाने वाला पर्दाफाश तब हुआ, जब दस्तावेज़ों से यह साफ हुआ कि निजी उपयोग की वास्तविक दूरी को छिपाने के लिए शासकीय वाहन के ओडोमीटर (किलोमीटर रीडिंग) में जानबूझकर लगभग 5,000 किलोमीटर की हेरफेर की गई है। इस गंभीर प्रशासनिक कदाचार और जालसाजी को संज्ञान में लेते हुए उच्च शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन ने स्वतंत्र जाँच के आदेश जारी कर दिए हैं।
इस कथित घोटाले को उजागर करने वाले अकाट्य दस्तावेजी साक्ष्य खुद सरकारी अभिलेखों और ऑटोमोबाइल सर्विस सेंटर के रिकॉर्ड से बाहर आए हैं। यह शासकीय वाहन 17 फरवरी 2026 को रायपुर में एक सड़क दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हुआ था, जिसके बाद इसे मरम्मत के लिए 19 फरवरी 2026 को रायपुर के अधिकृत टोयोटा सर्विस सेंटर ‘काइज़ेन मोटोवेंचर्स प्रा. लि.’ भेजा गया था। टोयोटा द्वारा 20 फरवरी 2026 को जारी आधिकारिक अनुमान पत्र (Estimate) के अनुसार, उस दिन सुबह 03:30 बजे गाड़ी का ओडोमीटर 1,99,634 किमी दर्ज था। लेकिन इसके ठीक दो महीने बाद, 18 अप्रैल 2026 को कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप द्वारा स्वयं सत्यापित सरकारी लॉगबुक में इसी वाहन की रीडिंग मात्र 1,94,436 किमी दर्ज की गई। भौतिक, यांत्रिक और वैज्ञानिक दृष्टि से यह पूरी तरह असंभव है कि दो महीने तक सड़क पर दौड़ने के बाद गाड़ी की कुल दूरी बढ़ने के बजाय 5,198 किलोमीटर कम हो जाए। यहाँ तक कि 4 जून 2026 को ली गई वाहन की वर्तमान भौतिक रीडिंग भी 1,95,651 किमी है, जो फरवरी की मूल रीडिंग से अब भी 3,983 किमी कम है, जो इस बात का सीधा और पुख्ता प्रमाण है कि ओडोमीटर को किसी इलेक्ट्रॉनिक या यांत्रिक माध्यम से पीछे घुमाया गया है।
जाँच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कुलसचिव ने नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर वाहन की चाबी और लॉगबुक अपने सीधे नियंत्रण में रखी थी ताकि इस सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल उनके परिवार की विलासिता के लिए किया जा सके। कुलसचिव के पुत्र, जो रायपुर के निजी मेडिकल कॉलेज में भारी-भरकम डोनेशन वाली मैनेजमेंट कोटा सीट से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें हर शुक्रवार को दुर्ग से रायपुर लेने और सोमवार को वापस मेडिकल कॉलेज छोड़ने के लिए इसी शासकीय वाहन को दौड़ाया जाता था, जिससे हर हफ्ते लगभग 240 किमी सरकारी ईंधन और संसाधन का निजी नुकसान हो रहा था। इसके अलावा, कुलसचिव की पत्नी, जो एक शासकीय विद्यालय में शिक्षिका हैं, उनकी रोज़ाना की आवाजाही और दुर्ग से करीब 120 किमी दूर महासमुंद स्थित पैतृक निवास में रहने वाली माता से मिलने के लिए भी नियमित रूप से इसी शासकीय वाहन का बेधड़क दुरुपयोग किया जा रहा था।गाड़ी की दुर्घटना के बाद उसकी मरम्मत कराने और भुगतान की प्रक्रिया में भी एक नया वित्तीय खेल सामने आया है। टोयोटा सर्विस सेंटर ने गाड़ी की मरम्मत के लिए 1,31,949 रुपये का अनुमान दिया था, जिसमें से यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के सर्वेयर ने 28,185 रुपये तक के क्लेम को वैध बताया था, लेकिन अधिकृत सर्विस सेंटर से काम न कराकर बीमा दावा दायर ही नहीं किया गया, जिससे विश्वविद्यालय को सीधे तौर पर आर्थिक क्षति पहुँची। इसके स्थान पर गाड़ी की कथित मरम्मत स्थानीय फर्म ‘शुक्ला इंटरप्राइजेज एण्ड स्टार नेट’ से कराई गई, जिसका जीएसटी नंबर वाहन मरम्मत की श्रेणी में पंजीकृत ही नहीं है बल्कि केवल माल या सेवाओं के प्राप्तकर्ता के रूप में दर्ज है। सबसे गंभीर और आपत्तिजनक बात यह है कि इस पूरी मरम्मत के लिए 24,780 रुपये का भुगतान विश्वविद्यालय की ‘परीक्षा निधि’ जैसे अत्यंत सुरक्षित और प्रतिबंधित फंड से किया गया, जिसका उपयोग केवल छात्र-छात्राओं की परीक्षाओं और अत्यंत गोपनीय शैक्षणिक कार्यों के लिए ही किया जा सकता है।
विधि विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकारी गाड़ी की रीडिंग घटाना, सरकारी ईंधन का निजी उपयोग करना और लॉगबुक में झूठे आंकड़े दर्ज करना सीधे तौर पर आपराधिक कृत्य और गंभीर सेवा कदाचार की श्रेणी में आता है, जिसके तहत भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 316 (धोखाधड़ी), धारा 336 (कूटरचना) और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 का घोर उल्लंघन होता है। इस पूरे मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति ने कुलसचिव, वाहन प्रभारी और वित्त अधिकारी तीनों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। चूंकि टोयोटा एटियोस जैसे आधुनिक वाहनों का ओडोमीटर बिना किसी विशेष इलेक्ट्रॉनिक टूल या हैकिंग के पीछे नहीं किया जा सकता, इसलिए इस मामले की तकनीकी जाँच के लिए पुलिस और परिवहन विभाग (आरटीओ) को भी शामिल करने की तैयारी की जा रही है। इस संबंध में पक्ष जानने के लिए कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई






