मिर्जापुर। जिले में पिछले कुछ दिनों के दौरान हुई अच्छी बारिश और उसके बाद निकली तेज धूप ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है। गांवों में इन दिनों लोककवि घाघ की मशहूर कहावत “रोहिणी बरसे, मृग तपे, कुछ-कुछ आद्रा जाए…” खूब चर्चा में है। किसान इसे इस साल अच्छी खेती का संकेत मान रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के अनुभवी किसानों का कहना है कि रोहिणी नक्षत्र में हुई बारिश और मृगशिरा नक्षत्र की गर्मी खेती के लिए बेहद लाभकारी मानी जाती है। खासकर धान जैसी खरीफ फसलों के लिए यह मौसम काफी अनुकूल माना जाता है। वर्तमान मौसम को देखकर किसानों को बेहतर उत्पादन की उम्मीद बंधी है।
हालिया बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी आ गई है, जिससे खेती की तैयारियां तेज हो गई हैं। किसान खेतों की जुताई, पाटा लगाने, मेड़ बनाने और खरपतवार साफ करने के काम में जुट गए हैं। उनका मानना है कि अब पड़ रही गर्मी मिट्टी को फसल के लिए और अधिक तैयार करेगी।
मानसून के करीब आते ही गांवों में भी हलचल बढ़ गई है। लोग अपने कच्चे मकानों, झोपड़ियों और खपरैल घरों की मरम्मत में लगे हुए हैं ताकि बारिश के मौसम में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
अगैती धान की खेती करने वाले किसान 1 से 5 जून के बीच नर्सरी तैयार करने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए बीज उपचार, खेतों की तैयारी और मेड़बंदी जैसे जरूरी कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि मौसम इसी तरह साथ देता रहा तो इस बार धान का उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर हो सकता है।
गांव के बुजुर्गों का मानना है कि घाघ की कहावतें केवल परंपरागत मान्यताएं नहीं हैं, बल्कि वर्षों के कृषि अनुभव पर आधारित हैं। मौजूदा मौसम को देखकर उन्हें भी लग रहा है कि इस बार खेती के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। यही वजह है कि किसानों के मन में अच्छी फसल और बेहतर आमदनी की उम्मीद फिर से जाग उठी है।





