पूर्व मुख्यमंत्री और विधायक कमलनाथ मध्य प्रदेश में जनता के मुद्दों को उठाने में लगातार सक्रिय है। इसी बीच महिला सशक्तिकरण पर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ सरकार “महिला वंदन” जैसे नारों का प्रचार कर रही है, वहीं दूसरी तरफ महिलाओं द्वारा संचालित पोषण आहार प्लांट बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
इन प्लांट्स पर करीब 300 करोड़ रुपये का कर्ज हो चुका है। निजी सप्लायरों ने भी भुगतान न मिलने के कारण आपूर्ति रोक दी है, जिससे पूरी व्यवस्था ठप पड़ गई है। हैरानी की बात यह है कि इस कर्ज को चुकाने का प्रस्ताव अब तक कैबिनेट की मंजूरी तक नहीं पहुंच पाया।
इन प्लांट्स को चलाने वाली कई महिलाएं अब बेरोजगारी की मार झेल रही हैं और मजबूरी में मजदूरी करने को विवश हैं। यह स्थिति ऐसे राज्य में सामने आई है, जहां पहले से ही कुपोषण एक बड़ी समस्या बना हुआ है और राष्ट्रीय औसत से भी खराब स्थिति में है।
कमलनाथ ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण सिर्फ नारों तक सीमित रह गया है, जबकि जमीनी स्तर पर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली योजनाएं बंद होती जा रही हैं। उन्होंने मांग की है कि सरकार तुरंत हस्तक्षेप कर सभी बंद पड़े प्लांट्स को दोबारा शुरू करे और कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को मजबूत बनाए।



