रायपुर या चाकूपुर? राजधानी में कानून-व्यवस्था की यह स्थिति देखिए माना बाल संप्रेक्षण गृह के पास तीन नाबालिगों ने 18 वर्षीय युवक की दिनदहाड़े चाकू मारकर हत्या कर दी। घटना ने एक बार फिर उठा दिया सवाल कि शहर में नाबालिग अपराध और चाकूबाजी को लेकर पुलिस का खौफ कहां है?
बुधवार शाम करीब चार बजे माना स्थित बाल संप्रेक्षण गृह पहुंचे 18 वर्षीय सावन सेन पर सरस्वती नगर थाना क्षेत्र की देवार बस्ती के तीन नाबालिगों ने चाकू से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल युवक को मेकाहारा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस के अनुसार, सावन अपने परिवार के छह सदस्यों के साथ वहां हत्या के मामले में निरुद्ध एक अपचारी से मिलने आया था। इसी दौरान तीनों नाबालिगों ने उसे निशाना बनाकर हमला बोल दिया। घटना के बाद तीनों को हिरासत में ले लिया गया है।
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपित नाबालिगों ने बताया कि करीब तीन महीने पहले पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र में सावन ने उनके एक साथी पर चाकू से हमला किया था। इसी रंजिश में उन्होंने बदला लेने का मौका तलाशा और बाल संप्रेक्षण गृह के बाहर उन्होंने हमला कर दिया।
यह घटना इसलिए अधिक चौंकाने वाली है क्योंकि हमला दिन के उजाले में, सार्वजनिक स्थान पर और बाल संप्रेक्षण गृह जैसी संवेदनशील जगह के पास हुआ। इससे सवाल उठता है कि क्या पुलिस और प्रशासन ऐसे इलाकों में निगरानी और सुरक्षा के प्रबंध पर्याप्त रूप से सक्रिय हैं?
रायपुर में चाकूबाजी और नाबालिग अपराध के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पिछले कुछ समय में भी नाबालिगों की संलिप्तता वाली चाकू से हत्या की घटनाएं दर्ज हुई हैं, जिनमें विवाद, प्रेम संबंध या छोटी-मोटी रंजिश जानलेवा हमले तक पहुंच गई।
जब नाबालिग बिना डर के दिनदहाड़े चाकू चला सकते हैं, तो यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था पर सीधा सवाल है।





