महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के कथित मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को बुधवार को रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया गया। अदालत में CBI ने उससे गहन पूछताछ के लिए 10 दिन की कस्टोडियल रिमांड मांगी, जबकि बचाव पक्ष ने उसकी गिरफ्तारी और ओमान से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को चुनौती दी।
सौरभ चंद्राकर को मंगलवार शाम फ्लाइट E6 2307 से दिल्ली से रायपुर लाया गया था। इससे पहले दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने CBI को उसे छत्तीसगढ़ ले जाने के लिए दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दी थी और 4 नवंबर या उससे पहले रायपुर की विशेष अदालत में पेश करने का निर्देश दिया था।
वकील ने उठाया प्रत्यर्पण का सवाल
सौरभ के वकील तुषार गिरी ने अदालत में दलील दी कि ओमान से भारत लाए जाने की प्रक्रिया में केवल ED से जुड़े मामले की मंजूरी शामिल थी, जबकि CBI के मामले के लिए ऐसी स्वीकृति नहीं दी गई थी। उन्होंने ओमान की अदालत के प्रत्यर्पण आदेश का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी पर उन्हीं आरोपों में कार्रवाई हो सकती है, जिनके आधार पर उसे भारत प्रत्यर्पित किया गया है।
इसके जवाब में CBI ने कहा कि रायपुर की विशेष अदालत पहले ही सौरभ चंद्राकर के खिलाफ ओपन-एंडेड गैर-जमानती वारंट जारी कर चुकी है। एजेंसी का तर्क था कि ED और CBI की जांच आपस में जुड़ी हुई हैं और गिरफ्तारी की वैधता संबंधी विवाद पर रायपुर की अदालत ही निर्णय देगी।
6,000 करोड़ के सट्टा नेटवर्क का आरोप
CBI के अनुसार, सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और उनके सहयोगियों ने मिलकर महादेव बुक ऐप का संचालन और प्रचार किया। आरोप है कि क्रिकेट, फुटबॉल, ताश समेत कई खेलों पर ऑनलाइन सट्टा लगाने के लिए देशभर में पैनल और फ्रेंचाइजी का विस्तृत नेटवर्क बनाया गया था।
जांच एजेंसी के मुताबिक, सट्टे से प्राप्त धनराशि को विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित कराया जाता था और कथित तौर पर हवाला के जरिए विदेश भेजा जाता था। इस मामले में छत्तीसगढ़ सरकार ने 13 FIR CBI को सौंपी थीं, जिनमें से दो मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है।
116 दिन बाद भारत वापसी
सौरभ चंद्राकर के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद ओमान की रॉयल पुलिस ने उसे 8 जुलाई 2026 को हिरासत में लिया था। CBI के अनुसार, वह कथित रूप से फर्जी यात्रा दस्तावेजों के आधार पर विदेश में रह रहा था।
प्रत्यर्पण प्रक्रिया पूरी होने के बाद CBI की टीम ने 1 नवंबर को उसे मस्कट से भारत लाया। इसके बाद दिल्ली अदालत से ट्रांजिट रिमांड लेकर उसे रायपुर लाया गया, जहां अब उसकी रिमांड याचिका पर सुनवाई चल रही है।
सियासत में भी गूंजी गिरफ्तारी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने CBI की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि पूछताछ में “प्रोटेक्शन मनी” के संभावित प्राप्तकर्ताओं का बड़ा खुलासा हो सकता है। वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सौरभ के खिलाफ कार्रवाई की शुरुआत कांग्रेस शासन काल में ही हुई थी, जिस दौरान 70 से अधिक FIR दर्ज हुई थीं।






