छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत चटकपुर में सड़क की कमी ने एक बार फिर विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक मरीज को इलाज के लिए एम्बुलेंस तक पहुंचाने के लिए खाट का सहारा लेना पड़ा। घटना से ग्रामीणों में आक्रोश है और उन्होंने सड़क निर्माण की मांग तेज कर दी है।
सड़क नहीं, तो मरीज खाट पर
बताया जा रहा है कि गांव में उचित सड़क संपर्क नहीं होने के कारण एम्बुलेंस मरीज के पास नहीं पहुंच सकी। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने मरीज को खाट पर लिटाकर कठिन रास्ते से एम्बुलेंस तक पहुंचाया। आपात स्थिति में यह दृश्य बताता है कि बुनियादी संपर्क मार्ग के अभाव में मरीजों की सुरक्षा और समय पर इलाज दोनों खतरे में पड़ जाते हैं।
विकास कागजों तक सीमित?
आजादी के 79 साल और छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 26 साल बाद भी चटकपुर जैसे गांवों में सड़क जैसी बुनियादी सुविधा न होना गंभीर चिंता का विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि बजट, योजनाएं और विकास के भाषण तो लगातार सुनाए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मरीज को भी खाट पर लदाकर ले जाना पड़ता है।
जिले में घोषणाएं और जमीनी हकीकत
जशपुर जिले में सड़क और स्वास्थ्य अधोसंरचना के लिए बड़ी राशि स्वीकृत होने की बातें भी सामने आती रही हैं। हाल ही में दुलदुला से चटकपुर-लोटापानी मार्ग के 18.6 किलोमीटर हिस्से के सुदृढ़ीकरण के लिए 7 करोड़ 62 लाख रुपये स्वीकृत किए जाने की जानकारी सार्वजनिक हुई थी, जबकि जिले में पुलों और पुलियों के लिए भी करोड़ों रुपये की स्वीकृतियां दी गई हैं।
सवाल: बजट कहां खर्च हो रहा है?
ग्रामीणों का सवाल है कि जब सड़क, पुल और स्वास्थ्य सेवाओं पर इतने बड़े बजट आवंटित हो रहे हैं, तो चटकपुर जैसे गांवों तक उसका लाभ क्यों नहीं पहुंच रहा है। उनका आरोप है कि धन का बड़ा हिस्सा घोषणाओं, विज्ञापनों और प्रचार में खर्च होता है, जबकि गांवों की जमीनी समस्याएं अनसुलझी रह जाती हैं।
प्रशासन से मांग
इस घटने के बाद ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनकी मांग है कि चटकपुर ग्राम पंचायत के दूरस्थ टोलों को सड़क से जोड़ा जाए, ताकि आपात स्थिति में एम्बुलेंस सीधे मरीज तक पहुंच सके और किसी की जान को खाट के सहारे बचाना न पड़े।
यह मामला केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की प्रभावी कार्यान्वयन व्यवस्था पर सवाल है। जब तक अंतिम गांव तक सड़क और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा नहीं पहुंचेगी, तब तक विकास की बड़ी घोषणाएं आम नागरिक के लिए केवल कागजी आश्वासन है।





