रायपुर।दुर्ग विश्वविद्यालय के कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से झटका लगा है। अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कराने के लिए दायर उनकी याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी।
मामला विश्वविद्यालय में एक महिला की कथित नियुक्ति और वेतन से जुड़ा है। आरोप है कि कुलसचिव ने अपने घर में खाना बनाने वाली महिला को विश्वविद्यालय में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में नियुक्त कराया, जबकि वह नियमित रूप से काम नहीं करती थी।
बाद में महिला ने विश्वविद्यालय प्रशासन को लिखित शिकायत देकर वेतन और काम दिलाने की मांग की। शिकायत के साथ उसने पासबुक, बैंक स्टेटमेंट, शपथपत्र और UPI ट्रांजेक्शन से जुड़े दस्तावेज भी जमा किए।
मामले की जांच के लिए विश्वविद्यालय ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर SSP दुर्ग से कार्रवाई की मांग की गई। इसके बाद 3 अगस्त को मोहन नगर थाने में कुलसचिव के खिलाफ धारा 316(4) के तहत FIR दर्ज की गई।
कुलसचिव ने FIR रद्द करने के साथ फैक्ट फाइंडिंग कमेटी और उसकी रिपोर्ट को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।




मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विभु दत्ता गुरु ने कहा कि शुरुआती तथ्य जुटाने के लिए की गई जांच में कुलाधिपति की पहले से अनुमति लेना जरूरी नहीं है। कोर्ट ने माना कि इस स्तर पर जांच और रिपोर्ट को चुनौती देना समय से पहले है।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने मामले में दखल देने से इनकार करते हुए कुलसचिव की याचिका खारिज कर दी।





