जगदलपुर।बस्तर जिले के नानगुर क्षेत्र के बड़े बोदल गाँव में धर्मांतरण को लेकर ग्रामसभा ने बड़ा फैसला लिया है। गाँव की ग्रामसभा ने अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का हवाला देते हुए बाहरी पादरियों व पास्टरों के बिना अनुमति गाँव में प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव पारित किया है। इसके बाद गाँव के मुख्य चौक पर इस संबंध में सूचना बोर्ड भी लगा दिया गया है।
14 अक्टूबर को आयोजित ग्रामसभा बैठक के बाद गाँव के अटल चौक पर बोर्ड लगाया गया। बोर्ड पर लिखा है कि गाँव में किसी भी प्रार्थना सभा, धार्मिक आयोजन या बाहरी धर्म प्रचारक की गतिविधि से पहले ग्रामसभा की विधिवत अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति पादरी या पास्टर का गाँव में प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है।

ग्रामसभा ने अपने फैसले के लिए पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूल्ड एरियाज़ एक्ट, यानी पेसा कानून का हवाला दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि पेसा कानून के तहत ग्रामसभा को अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण का अधिकार प्राप्त है। इसी अधिकार के तहत गाँव में धर्मांतरण की गतिविधियों पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।
सूचना बोर्ड में हिंदू धर्म और संस्कृति को प्रभावित करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ पंचायत द्वारा सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम का भी उल्लेख किया है, जिसका उद्देश्य प्रलोभन, दबाव या किसी अन्य तरीके से किए जाने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना है।
यह मामला अकेले बड़े बोदल तक सीमित नहीं है। बस्तर और सुकमा के कई गाँवों में ग्रामसभाएँ पेसा कानून का हवाला देकर पादरियों के प्रवेश, धार्मिक आयोजनों और चर्च निर्माण पर प्रतिबंध लगाने के फैसले ले रही हैं।





