बालाघाट।कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 1 अक्टूबर के बालाघाट दौरे के दौरान युवा कांग्रेस की भूमिका को लेकर पार्टी के भीतर सवाल उठने लगे हैं। राहुल गांधी ने बालाघाट के बिरसा ब्लॉक के जगला गांव पहुंचकर मृत आदिवासी बच्चों के परिजनों से मुलाकात की और इस मुद्दे को संसद में उठाने की बात कही।
इसी दौरे से जुड़ा एक दावा राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। दावा किया जा रहा है कि जब मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया राहुल गांधी के कार्यक्रम में पहुंचे, तो राहुल गांधी के स्टाफ ने उन्हें कथित तौर पर धक्का देकर अलग कर दिया। हालांकि, इस घटना की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में नहीं मिली है।
पुराने दौर से आज की युवा कांग्रेस तक चर्चा
कांग्रेस के भीतर चर्चा इस बात को लेकर भी है कि युवा कांग्रेस की सक्रियता का स्वरूप समय के साथ कितना बदला है। पार्टी के पुराने दौर को याद करते हुए कहा जा रहा है कि जब जीतू पटवारी और कुणाल चौधरी युवा कांग्रेस के अध्यक्ष थे, तब राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरों में युवा कांग्रेस बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए जानी जाती थी।
दावा यह भी किया जा रहा है कि उस दौर में युवा कांग्रेस के प्रमुख नेताओं को राहुल गांधी के कार्यक्रमों में मंच पर स्थान मिलता था और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी भूमिका अधिक दिखाई देती थी। मौजूदा समय में युवा कांग्रेस की कार्यशैली को लेकर पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं के बीच सोशल मीडिया और रील-केंद्रित राजनीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
यश घनघोरिया को नवंबर 2025 में मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
‘रील की राजनीति’ बनाम जमीनी संगठन का सवाल
बालाघाट की घटना के बहाने अब कांग्रेस के भीतर यह बहस भी सामने आ रही है कि युवा कांग्रेस को सोशल मीडिया गतिविधियों के साथ-साथ जमीनी संगठन, कार्यकर्ताओं की लामबंदी और वरिष्ठ नेताओं के कार्यक्रमों में प्रभावी भागीदारी पर कितना जोर देना चाहिए।
हालांकि, यश घनघोरिया को धक्का दिए जाने का दावा और युवा कांग्रेस की मौजूदा कार्यशैली पर लगाए जा रहे आरोप अलग-अलग दावे हैं, जिनकी पुष्टि के लिए संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
राहुल गांधी के बालाघाट दौरे में करीब डेढ़ हजार लोगों की मौजूदगी की रिपोर्ट सामने आई है। उन्होंने मृत बच्चों के परिवारों से मुलाकात कर स्वास्थ्य, शिक्षा और आदिवासी अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए।
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि युवा कांग्रेस का मौजूदा नेतृत्व जमीनी संगठन को मजबूत करने और बड़े नेताओं के कार्यक्रमों में अपनी प्रभावी भूमिका सुनिश्चित करने पर कितना ध्यान देता है।







