रायपुर।राजधानी रायपुर के पास स्थित मोहरेंगा नेचर सफारी अब इको-टूरिज्म और पक्षी-पर्यटन के एक नए प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान बना रहा है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप की पहल और जनभागीदारी आधारित संरक्षण की सोच के तहत यहां तीन दिवसीय ‘सहयोगात्मक पक्षी निगरानी’ राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया।
निमोरा स्थित ठाकुर प्यारेलाल राज्य ग्रामीण विकास संस्थान में हुए इस सम्मेलन में देश के 12 राज्यों से करीब 70 पक्षी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और पर्यावरणविद शामिल हुए। सम्मेलन के दौरान मोहरेंगा नेचर सफारी की समृद्ध जैव-विविधता और पक्षियों की अलग-अलग प्रजातियों ने सभी का ध्यान खींचा।
एक दिन में 57 प्रजातियों की पहचान
सम्मेलन के सबसे खास कार्यक्रम के तहत 5 सितंबर को सभी विशेषज्ञों ने मोहरेंगा नेचर सफारी का दौरा किया। छत्तीसगढ़ के पक्षी विशेषज्ञ मोहित साहू, सोनू अरोरा और मनजीत कौर बल के नेतृत्व में सुबह और शाम पक्षियों का सर्वे किया गया।
इस दौरान एक ही दिन में 57 अलग-अलग पक्षी प्रजातियां दर्ज की गईं। इनमें सर्पग्रीवा (Oriental Darter), भारतीय धूसर धनेश (Indian Grey Hornbill), दूधराज (Indian Paradise-Flycatcher) और शॉर्ट-टोड स्नेक ईगल जैसी पक्षी प्रजातियां भी शामिल रहीं।

सफारी में बया वीवर की एक सक्रिय प्रजनन कॉलोनी भी देखने को मिली, जिसने विशेषज्ञों का खास ध्यान आकर्षित किया। सर्वे के दौरान दर्ज किए गए पक्षियों का डेटा मौके से ही वैश्विक eBird प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया गया।
पक्षी निगरानी के साथ तकनीकी कार्यशालाएं भी
मोहरेंगा सफारी में केवल पक्षियों का सर्वे ही नहीं हुआ, बल्कि eBird डेटा की गुणवत्ता, उसकी समीक्षा और Citizen Science यानी नागरिक विज्ञान को लेकर तकनीकी कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं।

इस दौरान अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक और प्रसिद्ध वन्यजीव छायाकार प्रदीप गुप्ता भी मोहरेंगा पहुंचे। दूसरे राज्यों से आए विशेषज्ञों ने मोहरेंगा की पक्षी विविधता और रायपुर के नजदीक इसकी आसान पहुंच की सराहना की। विशेषज्ञों का कहना था कि इन खूबियों के चलते मोहरेंगा में देश के प्रमुख बर्ड टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित होने की काफी संभावनाएं हैं।

एक साल की संयुक्त कार्ययोजना तैयार
सम्मेलन के समापन दिवस पर संस्थान परिसर में सुबह बर्डिंग के बाद सभी राज्यों के प्रतिनिधियों ने पक्षी निगरानी के लिए एक साल की संयुक्त कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया। इसमें नियमित पक्षी गणना, बेहतर डेटा मानक और राज्यों के बीच समन्वय पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजित ‘छत्तीसगढ़ बर्डर्स मीट’ में प्रदेशभर से आए पक्षी प्रेमियों ने वन मंत्री केदार कश्यप की जनभागीदारी आधारित जैव-विविधता संरक्षण की पहल की सराहना की।

इस आयोजन के बाद मोहरेंगा नेचर सफारी को केवल पर्यटन स्थल के बजाय पक्षी निगरानी, नागरिक विज्ञान और जैव-विविधता संरक्षण के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भी नई पहचान मिलती दिखाई दे रही है।






