छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर की तस्वीर सरकार के गौ-प्रबंधन के दावों पर सवाल खड़े करती है। भाजपा सरकार के आने के बाद पिछली सरकार के बनाए गौठान बंद हो गए। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 1460 गौ-धाम बनाने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक 50 भी गौ-धाम तैयार नहीं हो सके हैं। गाय के नाम पर भावनाएं जुटाना आसान है, लेकिन गाय के लिए व्यवस्था करना मुश्किल नजर आ रहा है।
जशपुर जिले में ग्रामीणों और मवेशियों की समस्या अब सड़कों पर साफ दिखाई दे रही है। गांवों में मवेशियों को रखने, उनके लिए दाना-पानी की व्यवस्था करने और गोबर, गौमूत्र व दूध के जरिए स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सभी ग्राम पंचायतों में कम से कम एक गौठान बनाया गया था। जिले में करीब 427 से अधिक गौठान बनाए गए थे, लेकिन बीते एक साल से अधिकांश गौठान वीरान पड़े हैं। इनमें अब मवेशी नजर नहीं आते।
इसका सीधा असर अब जिले की सड़कों पर दिखाई दे रहा है। खेतों में धान की फसल खड़ी होने के कारण किसान अपने खेतों की रखवाली कर रहे हैं। ऐसे में गांवों के गाय, बैल, भेड़ और बकरियां सड़कों पर घूमते दिखाई दे रहे हैं। शहर की सड़कों से लेकर स्टेट और नेशनल हाईवे तक जगह-जगह मवेशियों के झुंड राहगीरों के लिए परेशानी और दुर्घटना का कारण बन रहे हैं।
शनिवार को जशपुर से सन्ना तक करीब 50 किलोमीटर की यात्रा के दौरान 30 से अधिक जगहों पर मवेशियों के झुंड के कारण रास्ते में रुकना पड़ा। जशपुर शहर में भगत पेट्रोल पंप के पास सड़क पर मवेशी मिले। इसके बाद बधिमा चौक पर मवेशियों का बड़ा झुंड सड़क पार करता दिखाई दिया।
आगे जरिया के करंजटोली, जरिया चौक और फतेहपुर बस्ती के पास भी सड़क पर मवेशियों का जमावड़ा मिला। मरगा से डूमरटोली कटने वाले मोड़, इंदाघाटी, ग्राम चड़िया चौक और केसरा में मुख्य सड़क पर मवेशी दिखाई दिए।
यात्रा के दौरान टेम्पू, टोंगो घाघरा और घाघरा मोड़ के पास भी सड़क पर मवेशियों के झुंड मिले। घाट चढ़ने के बाद ग्राम रजौटी और हरीपाठ के पास भी मवेशियों की मौजूदगी से वाहन चालकों को सावधानी से गुजरना पड़ा। हर्रापाठ से सोनक्यारी की ओर जाने के दौरान तेक्राकोना घाट पर एक जगह बकरियों और दूसरी जगह भेड़ों का झुंड सड़क पर नजर आया।
सवाल यह है कि जब खेतों में फसल खड़ी है और गांवों में मवेशियों को रखने की व्यवस्था नहीं है, तो आखिर पशुपालक अपने मवेशियों को कहां रखें? करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए गौठानों के खाली पड़े रहने और सड़कों पर मवेशियों के बढ़ते जमावड़े के बीच सरकार की गौ-व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
घोषणाएं बड़ी हैं, लेकिन जमीन पर गौठान खाली हैं और सड़कें मवेशियों से भरी हुई हैं।





