सरकार भले ही बच्चों को सुरक्षित और सुलभ शिक्षा उपलब्ध कराने के दावे करती हो, लेकिन रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत क्रोंधा की तस्वीर इन दावों की पोल खोलती नजर आती है। यहां करीब 50 छात्र-छात्राएं हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर उफनते नाले को पार कर धरमजयगढ़-खड़गांव स्थित स्कूल पहुंचने के लिए मजबूर हैं।
बारिश के मौसम में बच्चों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। छात्र-छात्राएं साइकिल से नाले तक पहुंचते हैं, फिर साइकिल वहीं छोड़कर घुटनों तक भरे पानी में नाला पार करते हैं। इसके बाद उन्हें करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचना पड़ता है। कई छात्राएं स्कूल ड्रेस भीगने से बचाने के लिए अलग कपड़े साथ लेकर जाती हैं और नाला पार करने के बाद स्कूल ड्रेस पहनकर कक्षा में पहुंचती हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि तेज बहाव के कारण बच्चों की जान हमेशा खतरे में रहती है। हाल ही में एक छात्रा तेज बहाव में बहने लगी थी, जिसे उसके साथियों ने समय रहते बचा लिया। वहीं, जब नाले का जलस्तर बढ़ जाता है तो कई दिनों तक बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।
क्रोंधा और खड़गांव के बीच स्थायी पुल निर्माण की मांग ग्रामीण वर्षों से करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2015 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री विष्णुदेव साय ने पुल निर्माण का आश्वासन दिया था। वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री बनने के बाद भी कई घोषणाएं और भरोसे दिए गए, लेकिन आज तक पुल का निर्माण शुरू नहीं हो सका।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से तत्काल पुल निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन सुरक्षित शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?




