बकावंड। बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड में संचालित मुख्यमंत्री डीएवी पब्लिक स्कूल एक बार फिर विवादों में है। स्कूल में पढ़ने वाले कई विद्यार्थियों के पालकों ने आरोप लगाया है कि बस शुल्क और अन्य बकाया फीस जमा नहीं करने पर बच्चों की ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) जारी नहीं की जा रही है। इससे विद्यार्थियों को दूसरे स्कूलों में प्रवेश लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के मुताबिक, बस्तर क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासन ने डीएवी पब्लिक स्कूल समूह के साथ समझौता कर मुख्यमंत्री डीएवी पब्लिक स्कूलों का संचालन शुरू किया था। लेकिन अब स्कूल प्रबंधन पर पालकों से विभिन्न मदों में शुल्क वसूली और फीस बकाया होने पर टीसी रोकने के आरोप लग रहे हैं।
ग्राम पंचायत टलनार निवासी किसान नरसिंह पुजारी ने बताया कि उन्होंने और गांव के अन्य पालकों ने इस मामले की शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में की है। उनका कहना है कि उनका बेटा पिछले 10 वर्षों से डीएवी स्कूल टलनार में पढ़ रहा है। वर्ष 2023 से उनका बेटा निजी वाहन से स्कूल आ-जा रहा है और इसकी जानकारी भी स्कूल को दी गई थी। इसके बावजूद उनसे बस शुल्क की मांग की जा रही है। उनका आरोप है कि शुल्क जमा नहीं करने पर टीसी देने से इनकार किया जा रहा है।

इधर, स्कूल से जुड़ी एक और समस्या सामने आई है। जानकारी के अनुसार, डीएवी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों को पिछले करीब छह महीने से वेतन नहीं मिला है, जिससे कर्मचारियों में भी नाराजगी है।
प्राचार्य ने क्या कहा?
डीएवी स्कूल के प्राचार्य श्री पांडेय ने कहा कि कई पालक समय पर फीस जमा नहीं करते हैं। ऐसे में स्कूल प्रबंधन को सख्त कदम उठाने पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल के कर्मचारियों को भी लगभग छह महीने से वेतन नहीं मिला है। यदि फीस की वसूली नहीं होगी तो स्कूल संचालन और कर्मचारियों की स्थिति और अधिक प्रभावित हो सकती है।
इस पूरे मामले को लेकर पालकों और स्कूल प्रबंधन के बीच विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।





