रायपुर।राजधानी रायपुर में एक रिटायर्ड डॉक्टर को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 1.28 करोड़ रुपये ठगने वाले साइबर गैंग के 3 और लोगों को पुलिस ने पकड़ लिया है। इससे पहले भी इस केस में एक आरोपी गिरफ्तार हो चुका था। अब पुलिस ने दिल्ली और कर्नाटक से तीन और आरोपियों को पकड़कर रायपुर लाया है।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के नाम आर्यन सिंह, जितेंद्र कुमार और राजदीप भाटिया हैं। इससे पहले हरियाणा से सोमनाथ महतो को भी पकड़ा गया था। जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने 18 अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल किया और करीब 10.76 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन किए। इन खातों को लेकर देश के 17 राज्यों में 88 शिकायतें दर्ज हैं।
कैसे फंसाया डॉक्टर को
मामला विधानसभा थाना क्षेत्र का है। रिटायर्ड वेटनरी डॉक्टर सपन कुमार ने शिकायत की थी कि उन्हें अनजान नंबरों से कॉल आए। कॉल करने वालों ने खुद को पुलिस, सीबीआई और क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया और कहा कि उनके क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है।
इसके बाद आरोपियों ने डर दिखाकर कहा कि जांच पूरी होने तक उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रहना होगा। लगातार व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए वे डॉक्टर पर नजर रखते रहे और उन्हें किसी से बात नहीं करने दी। डर और दबाव बनाकर आरोपियों ने अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवा लिए।
16 जनवरी को भी उनसे 55 लाख रुपये एक और खाते में जमा करवाए गए, जिसके लिए उन्होंने अपनी एफडी तक तुड़वा दी। इस तरह कुल 1.28 करोड़ रुपये की ठगी की गई।
पूरे देश में फैला था नेटवर्क
जांच में पता चला है कि यह गिरोह कई तरह के ऑनलाइन फ्रॉड करता था, जैसे लिंक फ्रॉड, शेयर ट्रेडिंग स्कैम, YONO APK फ्रॉड, पार्ट टाइम जॉब, क्रिप्टो स्कैम, फिशिंग, लॉटरी फ्रॉड, OTP शेयरिंग, सिम स्वैपिंग और OLX फ्रॉड आदि।
पुलिस और साइबर सेल की टीम ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच कर आरोपियों तक पहुंच बनाई। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह देशभर में लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर ठगी कर रहा था।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर कोई खुद को पुलिस, सीबीआई या किसी एजेंसी का अधिकारी बताकर पैसे ट्रांसफर करने को कहे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में शिकायत करें।







